BP accounting in depth BASIC ACCOUNTING PROCEDURES

BASIC ACCOUNTING PROCEDURES

BASIC ACCOUNTING PROCEDURES — a Bank Promotions accounting in depth video lecture on Learning Sessions.

14 Jun 2026 52:33 min 11 views
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accounting concepts and conventions हमने जो है module A start किया था कल हमारा first lecture था module A का जिसमें हमने introduction of accounting पड़ी थी कि accounting होती क्या है ठीक है कैसे की जाती उसके बारे में हमने detail में बात की थी तो अगर आपने वो video या session नहीं देखा हुआ तो उसका link आपको video के description box में मिल जाएगा उस link पे click करके आप वो video भी जरूर देख लीजिए आज जो हम यहाँ पे पढ़ने वाले हैं वो है accounting concept and convention यह हमारा accounting का most important topic होता है अगर आपको accounting की अपनी पकड़ बनाने accounting में तो आपको accounting concept and conventions के बारे में पूरी detail में पता होना चाहिए तो आज हम इसी के बारे में पढ़ेंगे कि accounting concepts and conventions होते क्या है तो शुरू करते हैं हमारा तो यहाँ पर देखो सबसे बड़े जो हमारा accounting concept होता है और जो हमारा accounting conventions होता है इसको एक साथ हम accounting principle क्या देते हैं ठीक है जो हमारे accounting concept हैं और जो accounting convention है वो हमारे basically क्या होते है accounting principles वो हमारे accounting principles के under ही आते हैं इनको हम एक साथ एक नाम दे सकते है accounting principles अब accounting principles यहाँ पर क्या होते है तो देखो जब हमने accounting का meaning किया था तो हमने देखा था कि accounting के कुछ अपने rules and regulations होते है principles होते है जिनको follow करके accounting की जाती है तो accounting principles basically किसे उनके तीन डाला बनाएं थे कि उपणिकल और दिजानिक करेंगे इनका में �ج्योग गaped को करे करना में इस साथ में एक्टेड अच्छा ग करें इसकमा जो पता है Accounting principles are set of rules and guidelines Accounting principles are set of rules and guidelines Which companies adopt to record and report their financial transactions Whenever a company creates a financial statement or records a financial transaction It records them according to these rules and regulations के according जो है record करेगी accounting principle हमें ये बताता है कि जब भी हम accounting करें तो हमें कौन सी transactions को record करना है और कौन सी transactions को record नहीं करना जिस transaction को हमें record करना है उसको किस value पर record करना है जैसे example क्लिए देखो जो हमारा cost concept होता है वो हमें बताता है कि आपकी company के जितने भी assets होती हैं उनको आप हमेशा cost price पे जो है record करो ठीक है तो यह हमें कौन बताता है accounting principle बताता है ठीक है क्योंकि अगर accounting principle ना हो तो हमें confusion हो कि यह जो हमने asset purchase किये उसको हम cost पे record करें या फिर जो उसका market में price चल रहा है उस पे record करें तो यहाँ पर हमें accounting principle बताता है कि आप जो है इस principle के according इसको cost price पे record करो ठीक है ऐसे ही हमारे business entity concept ठीक है वो हमें क्या बताता है कि जब आप accounting करो तो आप जो है business और owner को जो है अलग अलग treat करो ठीक है यह हमें कौन बता रहा है accounting principle ठीक है तो जब भी हम accounting करेंगे तो इन ही accounting principles को follow करके जो है यहाँ पर accounting करेंगे ठीक है तो अब question यह उड़ता है कि हमें accounting principle की ज़रूरत क्यों है क्यों हमें accounting principles बनाने है मैं अपनी financial state मिना accounting principles की क्या बना सकता हूँ क्यों हमें accounting principle की जुरूत पड़ती है तो यहाँ पर देखो जब हम accounting करते हैं तो उसमें हमारा जो main objective होता है उसमें से एक important objective होता है क्या कि अपनी performance को judge करना अपनी performance को judge करना कि यह जो हम business कर रहे हैं उसमें हमारी performance कैसी है क्या हम growth कर रहे हैं कि नहीं growth कर रहे हैं so हम performance कैसे check करते हैं generally देखो हम क्या करते हैं जो अपनी performance होते हैं उसको compare करते हैं अपने competitor के साथ ठीक है तो मान लो यहाँ पर हमारी company है ठीक है हमें अपनी company की performance चेक करने तो हमने क्या किया हमारा competitor है फैंड पर में वो हमारे बॉज तरह का टांप करता वह भी वह प्रणाएट बनाता जो हम प्रणाएट बनाते उसी चीज में डिवरिंग करता है तो यहां पर अगर मुझे अपनी प्रेफर्मेंस चेक करने कि क्या मैं इससे बेहतर हूं की तो मैं क्या करूँगा, अपने, अपने आपको compare करूँगा, अपनी financial statement को compare करूँगा, किसके साथ, इसकी financial statement के साथ, इसके work के साथ, ठीक है, जब मैं comparison करूँगा, तो उससे मुझे पता लग जाएगा, कि मैं कितना growth कर रहा हूँ, ठीक है, कितना इससे आगे हूँ, या फिर � नहीं है, उन्होंने same rules and regulations को follow करके ही अपनी financial statement बनाई हो, ठीक है? अगर financial statement उन्होंने अलग-अलग rules and regulations के according बनाई है, मतलब की ये form A है, उसने अलग अपने तरीके से की है, हमने जो accounting वो अपने तरीके से कर ली है, तो possible नहीं होता comparison करना, ठीक है? जैसे example तो इसने मैं आपको बता दूँ, यहाँ पर देखो, एक 5 लाग का loan है, ठीक है, एक 5 लाग का loan है, तो यहाँ पर देखो, हमने अपने इसाब से accounting की, और इसको हमने क्या माना, एक asset माना, ठीक है, हमने कहा, कि इसको हमने जो है, एक asset की तरीके से अपने financial statement में दिखा दिया, ठ बिलकुल नहीं, क्योंकि एक transaction को हम asset मान रहे हैं, वो दूसरा liability मान रहे हैं, तो यहाँ पर comparison possible नहीं होता, तो यहाँ पर जो है accounting principle का role आता है, accounting principle हमें बताता है, कि आप जो है same rules and regulations, specific rules and regulations को follow करके यहाँ पर अपनी financial statement बनाओ, तो वही same rules and regulations principle को हम follow कर रहे हैं, ठीक है, हमने � easily जो है comparison कर सकते हैं, ठीक है, तो एक हमारा जो objective है comparison करना, उसके लिए भी हमें accounting principle की जरूरत पड़ती है, तो accounting principle जब generally यहाँ पर बता दिया गया है, accounting principle ने एक चीज कहा दिया है, कि जो आपने 5 लाग का loan लिया है न, उसको आप liability ही मानोगे, यह किसने बताया है, accounting principle ने बता ठीक है, दूसरा objective क्या होता है, performance चेक करनी, उसके बाद हमारा दूसरा objective क्या होता है, कि जो हमारी performance है, उसको हम communicate कर पाए, मतलब कि बता पाए, इसको बता पाए, जो हमारे owners हैं, जो हमारे investor हैं, जो हमारे business में invest करना चाते हैं, उनको हम बता पाए, कि हमारी जो performance है, वो इत investor investor है वह हमारी company investment चाहता है हम जो है अपनी company की performance जो है यहां पर इसको बताना चाहता है कि हमने So, what will check? For checking our performance, what will you check? Our financial statement. What will you check here? Financial statement okay The financial statement which we made is according to us According to us, we considered it as an asset and it was considered as a liability और ये जो person है उसको पता नहीं है कि आपने किस तरीके से जो है यहाँ पर अपनी financial statement बनाएगा, अब ये आपसे जाके पूछेगा तोड़ी कि यार तुने इसको क्या माना है, इसको asset माना है, इसको liability माना है, तो ये जो है understand नहीं कर पाएगा हमारी financial statement को, तो इसके लिए ज़ इसको भी accounting principle के बारे में knowledge है, इसको भी पता है कि अगर अगर loan लिया है, तो उसको जो है liability माना गया होगा, क्योंकि accounting principle ये कहता है कि loan लिया है, तो उसको आप liability माना है, इस person को भी पता है, तो इसने easily महापे financial statement में study कर लिया, कि ये loan है, तो ये एक तरह का liability है, तो इस दो objectives को पूरा करने के लिए, तो I hope आपको यहाँ पर accounting principles का meaning clear हो गया होगा, तो last मैं conclude कर देता हूँ, ये कुछ हमारे set of rules and regulations होते हैं, guidelines होते हैं, ठीक है, जो companies follow करते हैं अपने financial statements को बनाने के, ठीक है, तो ये हमारा meaning है, तो फटबट से एक बारे chat box में बता दिजे, क्या आपको य पहला link हमारा क्या है, वहाँ पे आपको attendance mark करने है, जैसे ही आप attendance mark करोगे, आपको जो है इस lecture के जो है free e-pdf notes मिल जाएंगे, पर सारे students को नहीं, हम five students को choose करेंगे, उन्हें ही ये notes वगैरा मिलेंगे, और इससे के साथ अगर आप AFM का course join करना चाहते हो, full course join करता है, तो उस का अगर आप Accounting Concepts होते हैं, वो Basic Assumptions होते हैं, Conditions होते हैं, जिनके base पे जो organizations होती हैं, जो company होती है, अपनी Financial Transactions को record करती हैं, और Financial Statements को prepare करती हैं, मतलब कि जब भी Financial Transactions को record किया जाएगा, तो इन Assumptions को ध्यान में रखके, यह Assume करके, जो है, Financial Transactions को record किया जाएगा, जैसे example के मैं आपको बता दूँ, ठीक है, यहाँ पर एक हमारा concept होता है, ठीक है, concept होता है, business entity concept, ठीक है, business entity concept हमें यहाँ पर देखो क्या कहता है, simply, यहाँ पर, कि business entity concept हमें देखो, simply क्या कहता है, कि जब भी आप accounting करो ना, तो यह assume करके चलो, क्या करके चलो, एक assumption लेके चलो, पर्शंस है जब आप अशारे तो यह विशेष को अलग पर संट्रीट करोगे और और पर संगीफ तरब करूंगे यह दोनों एक से अलग है यह बहुत असतार ठीक असतार अशारे बिजनेस एंट्री कंसैप्ट कि आप उपलब्ध करके चलो रहे हैं और बहुत सारे concept है जिसके बारे में हम detail में बात करेंगे तो accounting concept हमारे basic assumption है यह हमें यह बताता है कि आपको कोई transaction को record करना है कि नहीं करना है अगर करना है तो किस मेंदर में record करना है ठीक है तो यहाँ पर एक एक करके हम जो है यहाँ पर transaction देख लेते हैं example यहाँ पर देखो business entity अब देखो basically क्या कहता है कि आप जब भी accounting करो तो यह चीज़ देखो कि जो हमारा यहाँ पर business है ठीक है ठीक है जो owner है वो अलग-अलग ठीक है यहाँ पर business अलग person है ठीक है और जो owner है वो अलग person है ठीक है जब भी आप accounting करेंगे तो यह सोच के चलोगे इन दोनों को आप � organization और जो business owner वो दो अलग-अलग entities है तो इस जब हम इसको record करते हैं यह record करते हैं तो इसके बेस्ट पर क्या होता है जब हम business के assets वगैरह खरीदते हैं जब हम इस concept को follow करते हैं और इनको अलग-अलग treat करते हैं तो जब भी हम business के लिए कोई asset खरीदेंगे जैसे कोई machinery खरीद � ले यहाँ पर बता दू एक राम person है वहाँ पर उसने जो है यहाँ पर chairs बनाने का एक business start किया है राम and sons यह उसने business का नाम लिख दिया तो business entity concept क्या कहता है कि यह जो राम person है और यह जो राम and sons है वो अलग-अलग person है इसका मतलब हुआ कि अगर आप राम and sons के लिए कोई ची� मोहर लगी तो यह जो राम person है वह क्लेम नहीं कर सकता कि यह बिल्डिंग मेरी है वो क्लेम नहीं कर सकता क्योंकि business entity क्वांसफ्ट कह रहा है कि बहुत अलग है बिजनस नहीं है तो इस concept के अकॉरिंग जब भी जब यहां पर � Unless में लगाता है ना, जैसे ये राम person है, अब ये जब business इसने start किया हो तो इसने कोई ना कोई पैसा लगाया होगा, इस business को start करने के लिए, तो ये जो पैसा लगाता है ना, राम person, business में, तो ये business के लिए क्या बन जाता है, एक कर्ज बन जाता है, एक liability बन जाती है, ठीक है, जैसे हम normal persons की बात करते हैं, जैसे मालो एक A person है और एक B person है, इसने यहाँ पर इसको 50,000 रुपीज दिये, ठीक है, तो यहाँ पर यह जो 50,000 रुपीज है, इसके लिए क्या बन गया, एक तरह का कर्ज बन गया, liability बन गया, जिसको इसको वापस करना है, ठीक है, एक time आएगा, कौन सा concept हमें बताता है, business entity concept, ठीक है, तो यहाँ पर देखो, hence the business transaction and personal transaction of its owner are different, तो यहाँ पर last line जो लिखी हुई, इसका मतलब है, कि जो owner की personal transaction है, और जो हमारे business की transaction है, वो बिल्कुल अलग-अलग है, उनको हमें एक नहीं मानना है, ठीक है, उसके बाद देखो, accounting transactions are recorded in the books of account from the organization's point of view, not the person or the business, इसका मतलब, कि जब भी हम business की transactions को record करेंगे, तो हमेशा business point of view से सोचेंगे, business को सामने रखना, और उसके point of view से सोचना, अगर business के पास कोई पैसा आ रहा है, ठीक है, तो वो business का पैसा हो, अब business से पैसा जा रहा है, तो आपने माना है कि वो पैसा जा रहा है, तो accounting आपने इस तरीके से करने है, clear है, उसके बाद देखो, यहाँ पर एक example है, कि जब यहाँ पर business owner ने पैसे invest किये, तो वो क्या बन जाती है, यहाँ पर liability बन जाती है, business की लिए, ठीक है, यह हमारा था business entity concept, उसके बाद next देखो हमारा क्या है, money measurement concept, अब money measurement concept क्या होता है, नाम से पता लग रहा है, इसकी पहले जरूरत देख लेते हैं क्यों पढ़ी है, तो देखो जब भी हम transaction को record करते हैं, financial transaction को record करते हैं, तो हमारे दिमाग में question जरूर आता है, कि हमें किस transaction को record करना चाहिए, और किस transaction को record नहीं करना चाहिए, तो यहाँ पर money measurement concept आता है हमारे पास, और कहता है भाई तो tension मत ले, आप क्या करो, जो भी transaction को आप monetary terms में calculate कर सकते हैं, तो आप सिर्फ उनहीं को books of account में record करो, इसका मतलब है, कि मान लो, यहाँ पर हमने car purchase की है, कितने की, 5,00,000 रपीस की, तो यहाँ पर उसके, जो आपने car purchase की है, उसकी, आप monetary terms में, पैसे की terms में value calculate कर सकते हैं, कितनी है, 5,00,000 रपीस, तो आप इसको अपने books of account में record कर लो, और इसके इलावा कोई और transaction है, जिसको आप पैसे की value, मनी की terms में calculate नहीं कर सकते हैं, उसको आप record मत करो, उनको छोड़ दो, तो money measurement concept हमें simply बताता है, कि आप सिर्फ उन्ही transaction, only those transaction, which can be expressed, which can be expressed in monetary terms are recorded in the books of account, सिर्फ हम उन्ही transaction को यहाँ पर record करेंगे, अपने books of account में, जिसको हम monetary terms में calculate कर सकते हैं, but the transaction which cannot be expressed in monetary terms are not recorded in the books of account, और वो transaction जिसको हम books of account में record नहीं कर सकते हैं, उनको हम अपनी books of account में जो है, sorry, वो transaction जिनको हम monated terms में convert नहीं कर सकते हैं, उनको हम books of account में record नहीं करेंगे, उसके बाद देखो, example यहाँ पर देखो, एक car purchase की गई है, जिसकी जो value है कितनी है 5,00,000 रुपे, तो आप जो है, इसको monated terms में calculate कर सकते हैं, तो इसको आप अपनी books of account में record कर लो, उसके बाद next एक raw material purchase किया गया है, 5,00,000 रुपे का, तो इसको भी आप monated terms में calculate कर सकते हैं, तो इसको अपनी books of account में record कर लो, ठीक है, ऐसे ही example कि अगर कोई जैसे quality of product होता है, कि हमारे product की quality कैसे, तो उसको आप monated terms में calculate नहीं कर सकते, तो आप उसको जो है अपने books of account में record नहीं करोगे, उसके बाद next एक हमारा concept क्या है, cost concept, अब cost concept हमें simply देखो क्या कहता है, कि आप अपने business में, लेकिन आप अपने business में जब भी कोई asset purchase करो, asset जैसे की building हो गई, land हो गई, machinery हो गई, तो उसको आप जो हमेशा उसके cost price पे जो है record करोगे, cost price का मतलब, जो cost आपको उस asset को acquire करने में लगी है, उस price पे जो है आप उसको अपने books of account में record करोगे, यहाँ पर देखो जो हमारे cost होती है, जो किसी asset को acquire करने की cost होती है, उसमें हम वो सभी चीज़े को include करते हैं, जो उस asset को acquire करने के लिए हमने खर्च वग़रा किया होता है, जिसे example के यहाँ पर देखो, एक machinery हमने purchase किया है, कितने की 50,000 rupees की, तो यहाँ पर हमने 50,000 rupees की machinery purchase किया है, उसके बाद next उसको अपने plant and machinery तक लियाने के लिए हमने यहाँ पर 10,000 rupees और खर्च कर दिये, transportation पर हमने खर्च कर दिये, उसके बाद उसको install करवाने के लिए, उसको fit करवाने के लिए हमने 10,000 wages और pay कर दिये, तो यहाँ पर आप देख सकते हो, कि वो जो machinery उसको acquire करने के लिए, production तक ready करने के लिए, आपने total 70,000 rupees खर्च कर दिये, कितने कर दिये, 70,000 rupees खर्च कर दिये, तो जो हमारा cost concept कहता है, वो कहता है कि अब जो आप machinery को record करोगे, अपने books of account में record करोगे, तो किस value पर record करोगे, 70,000 rupees पे, ठीक है, purchase, जिस पे आपने purchase किया वो नहीं, तो जो हमारा cost concept कहता है, वो कहता है कि अब जो हमारा cost concept कहता है, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value पर record करोगे, तो किस value टाइम स्टेट डेट ऑल बिजनेस एसेट शुड बी रिटर्न डाउन इन द बुक्स ऑफ अकाउंट एड एक्ट्रूल कॉस्ट उसको एक्ट्रूल कॉस्ट आई होगी उस एसेट को एक्वायर करने के उस पर जो है रिकॉर्ड की जाएगी इंक्लूडिंग द पॉजिशन पर पे किया गया इंसॉलेशन के टेन थाउसएंड के लिए इसीलिए जो हमारे एक्ट्रूअल कॉस्ट है वह कितनी यह सेबकल अब तो आप इसको १०८ ही रिकॉर्ड तैयूरों की जिसके बाद निकालमारा यहां पर नेक्स्ट करेगा कौन 5000 concept, अब going concern concept हमें देखो basically क्या गहता है, कि जब भी हम कोई business करते न, जब भी हम कोई business करते हैं, और उसकी जो है accounting करते हैं, तो हम इस तरीके से करते हैं, हम ये मान के, ये assume करके चलते हैं, कि ये जो हमारा business है न, वो लंबे समय तक चलेगा, मतलब कि ऐसा नहीं है, कि हम एक साल तक business करके बंद कर देंगे, ये जो हम business कर रहे हैं, वो जो है पूरे एक, पूरे चलता ही रहेगा, indefinite life, मतलब कि बहुत लंबे समय तक चलता रहेगा, ये हमारा क्या होता है going concern concept, देखे हमें जब भी accounting करने है, तो इस तरीके से करनी है, कि हमारा business जो है, वो कभी भी बंद नहीं होगा, वो हमेशा चलता ही रहेगा, ठीक है, तो यहाँ पर ही हमारा going concern concept है, इसका meaning देख लेते हैं हमारा, तो going concern concept in accounting state that a business activity will be carried by any form for unlimited duration, this simply means that every business has continuity of life, इसका मतलब क्या है, कि जो business activities होंगी वो इसको जो है, यहाँ पर unlimited duration के लिए किया जाएगा, बहुत लंबे समय तक किया जाएगा, तो इसका मतलब क्या है business की जो life होगी, वो continuity में चलेगी, life हमारा business जो है बंद नहीं होगा, हमारा business जो है, वो चलता ही रहेगा future में, ठीक है, तो यह हमारा होता है, यहाँ पर going concern concept, ठीक है, तो simply going concern concept हमें यही कहता है, कि आप accounting यह मान के चलो, कि हम business लंबे समय तक चलेगा, ऐसा ना हो कि आप यह सोचो, कि एक साल में business बंद होना है तो आप जो है, उस हसाब से accounting करो अपने assets को जो है, उसकी market value पर record कर दो, तो ऐसा नहीं करना है, आपको मान के चलना है, कि business हमारा लंबे समय तक ही चलेगा उसके बाद next हमारा देखो, यहाँ पर क्या है accounting period concept, accounting period concept यहाँ पर देखो क्या होता है simply यह हमें यह कहता है, कि जब हमने going concern में क्या समझा था कि हमारी जो business की life ओ indefinite है, मतलब कि बहुत लंबे समय तक हमारा business जो है चलेगा, तो जो accounting period concept होता है, वो क्या करता है कि जो हमारे business की indefinite life है ना, उसको जो है parts में divide कर दिता है देखे, हमने यह going concern concept में यह मान ले कि business लंबे समय तक चलेगा, तो accounting period concept कहता है कि आप जो है यहाँ पर जो पूरी business की life है उसको parts में divide कर दो, यह parts में divide कर दो और आप जो है accounting एक limit, fixed period के लिए करो ताकि आपको जो है business के बारे में अच्छी information जो है, बढ़िया information जो है मिलती रहे, तो accounting period concept में simply हम क्या करते हैं, कि हम जो accounting करते हैं, वो एक limited period के लिए करते हैं, एक specified period के लिए करते हैं वो हमारा जो period होता है, वो generally one year के लिए होता है, तो accounting period कहता है कि आप, accounting period concept कहता है कि आप जो है यहाँ पर एक fixed period के लिए accounting करो, तब तक आप जो है business की transaction को proper तरीके से record करते रहो, जैसे ही आपका वो period खतम होता है, उसके बाद आप क्या करो, उन transaction के base पे उनकी summary बनाओ, और उससे जो financial statement prepare करो, और उससे जो है result find out करो, कि आपके business की growth कैसी है, आप growth कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो, आपकी performance कैसी है ऐसा ना हो कि आप जो है जब तक business बंद नहीं होता, तब तक सिर्फ recording ही करते रहो, तो वो recording करने का कोई benefit नहीं है, accounting करने का main purpose ही है, कि business के बारे में information, अपनी performance के बारे में, और performance को communicate करना, यह objective होता है, तो accounting period concept कहता है, कि आप accounting periods में करो, यह जो period ना, one period का, तो जो हम accounting करते हैं, वो generally एक link specified period के लिए यहाँ पर perform करते हैं, तो यहाँ पर meaning देखो हमारा यहाँ पर, accounting period concept assumption that business transaction is recorded for a specified period, एक specified period के लिए business transactions को record किया जाएगा, उसके बाद, जो हमारे transaction को record किया है, उसके base पे हमें ये find out करना है, कि हमें जो है, यहाँ पे profits कितना हुए, losses कितने हुए, उस specified period में, तो ये हमारा क्या होता है यहाँ पर, accounting period concept, clear है आपको, अब जो accounting period concept है, उसके according यहाँ पर, हमें जो है हर साल, balance sheet बनानी पड़ती है, profit and loss account बनाना पड़ता है ठीक है और उससे जो है यहाँ पर result विगरा find out करने पड़ते हैं जो accounting period concept है वो हमें कहता है कि आप हर साल नई balance sheet बनाओ हर साल profit and loss account जो है वो नया बना ठीक है तो यह हमारा था accounting period concept I hope आपको यहाँ तो clear हो गया होगा उसके बाद next देखो हमारा क्या है dual aspect concept अब dual aspect concept देखो क्या होता है simply एक यह कहता है यह कि हम जो business में transaction हो रही है ना कोई भी transaction हो एक single transaction हो ना उसके दो aspect होते हैं dual aspect को मतलब कि दो aspect जैसे यहाँ पर एक transaction हो वी यहाँ पर ह पर चेस किया तो यह क्या है एक simple बिजनेस ट्रांजेक्शन है तो जो dual aspect concept है ना वो क्या कहता है कि यह जो आपने transaction की है ना इसके दो aspect हैं ऐसे दो aspect हैं तो यहाँ पर देखो furniture हमने purchase किया तो furniture हमारे पास आया ठीक है एक aspect इसका क्या हो गया कि हमारे पास furniture आया दूसरा aspect दे� यहां पर दो अस्पेक्ट होते हैं, एक आना, एक जाना, एक डैबिट और एक क्रेडिट, जब हम आगे-आगे क्वेश्चन सॉल्व करेंगे, जब आगे अकाउंटिंग बारे में पढ़ेंगे, तो डैबिट, क्रेडिट डिटेल में समझेंगे, तो जो हमारा यहाँ पर dual aspect concept है, वो हमें यही कहता है, कि जो हमने जितनी भी transaction business में होती है, उसके हमेशा दो aspect होते हैं, और हमें जो है, उन दोनों aspect को जो है, follow करना होता है, record करना होता है, ठीक है, आपने double entry system के बारे में सुना होगा, double entry system है, हम जो है, एक transaction को दो जगा पे record करते हैं, तो वो क्यों करते हैं, इसी concept के वज़े से, क्योंकि ये concept हमें कहता है, कि transaction के दो aspect हो, और उसको आप दो जगा पे record करो, ठीक है, तो यहाँ पर देखो, dual aspect is the foundation of accounting, ठीक है, जो हमारा accounting है, उसके लिए एक important concept है, ठीक है, ये जो है foundation है, ठीक है, नीव है हमारा accounting की, ठीक है, और ये जो assume करता है, कि every transaction has a dual aspect, it means every business transaction has two aspect, हर business transaction के दो aspect होते हैं, ठीक है, एक बढ़ना और एक घटना, ठीक है, तो यहाँ पर, therefore transaction should be recorded at two places, इसलिए हम उसको दो places पे जो है, record करते हैं, हर aspect, transaction के जो भी aspect है, हर aspect हो जो हम अपनी books of account में जो है, record करते हैं, ठीक है, example की यहाँ पर, एक machinery purchase की गई है, 50,000 की, तो इसमें आप देख सकते हैं, कि machinery आपके पास आएगी, पर आपके पास से cash भी चला जाएगा, तो इस transaction के क्या है, दो aspect है, clear है, clear है, उसके बारे, next देखो हमारा क्या है, matching concept, matching concept देखो क्या होता है, generally जो matching concept है, वो हमें कहता है, कि आप, आप क्या करो, हमने accounting period concept में पढ़ा, कि जब हम accounting करते हैं, तो वो क्या करते हैं, ए, one year के लिए करते हैं, ठीक है, हम one year तक transactions को record करते हैं, उसके बाद उससे profit वगेरा find out करते हैं, अब हम profit कैसे find out कर सकते हैं, देखो, जो भी हमारे पास revenue आया, जो हमारे पास यहाँ पर, जो भी हमने revenue गमाया, ठीक है, उसको अगर हम expenses के साथ compare करें, ठीक है, हम expenses के साथ compare करेंगे, कितना हमारे पास revenue आया, और उस revenue को कमाने के लिए हमने कितना खर्च किया, तो उसका जो difference होगा, वो हमारा क्या होगा, profit and loss होगा, उससे हमें जो है, पता लगेगा, तो यहाँ पर जो matching concept है, वो क्या कहता है, कि one year के period में, जो हमने यहाँ पर one year का period क्या हो, जब तक हमने यहाँ पर accounting किया है, तो इस one year के period में, जितने भी हमने यहाँ पर, हमें जो है, revenue रिसीब हुई है, ठीक है, revenue रिसीब हुई है, और जितने भी हमने expenses किये हैं, उनको आपस में match करना है, यह हमारा क्या कहता है यहाँ पर matching concept और उससे result find out करना कि हमें profit हुआ है या फिर loss हुआ है और यहाँ पर जो matching concept है वो हमें simply यह बताता है यह clearly बताता है कि यह जो revenue होने चाहिए और यह जो expenses होने चाहिए वो same year के होने चाहिए इसका मतलब क्या है कि अगर यहाँ पर मालो example के 2018-19 है ठीक है यह हमारा एक accounting period है तो यह जो revenue को हम compare करें इस expense के साथ तो यह revenue भी हमारा 2018-19 में होना चाहिए और यह जो expenses है वो भी हमारे किस में होने चाहिए 2018-19 में ठीक है दोनों same होने चाहिए उनहीं को हम आपस में compare करें ऐसा matching concept ठीक है तो यहाँ पर meaning देख लेते है the matching concept state that revenue and expenses in cut to earn the revenues must belong to the same accounting period same accounting period के हमारे expenses और जो हमारे revenue वो होने चाहिए clear है clear है उसके बाद देखो in matching concept revenues are compared with expenses ठीक है इसमें हमने पढ़ी लिया कि जो revenues होती है उनको compare किया जाता है किसके साथ expenses के साथ और एक अगर जो हमारा revenue होता है � तो हम यहाँ पर क्या कहते हैं प्रॉफिट और अगर जो हमारा revenue होता है उसको हम यहाँ पर क्या कहते है लॉस्ट जैसे example में मान लूप आपके जो साल में जो रेवनी हो वह यहाँ पर वन लेकर पीस के पर जो आपके expenses हो वह कितने हो नाइटी थाउसन रुपीस के तो यह � इन कंसेप्ट को फॉलो करते हैं मैचिंग सब को फॉलो करके हमें यह इनफॉरमेशन जो है मिलती है ठीक है एग्जांपल भी यहां पर देखो एक रेवनी यह दिया हुआ है कि 2000-2011 में जो 5 लेकर पीस के में रेवनी हुए थे और एक्सपेंसर्स कितने हुए थे फॉर ले रेवनी यह एक्सपेंसिस कहते हुए और लग करते कि क्वीक्राइटिंग रिग्लाइड कंसेप्ट के लिए संख रेवनी। पिछला ni empre जो हमारा और वापस आप वह हमें क्या कहता है कि जब भी आपके स्टुब्डा आपकांटी करो ठीक है जब भी accounting करो, आपको कोई income record करनी है, ठीक है, आपको कोई income या फिर revenue जो है, अपनी books of account में record करते हैं, मालो आपने sale किया, और sale से पैसा आया, तो उसको अपने books of account में record करना चाहते हो, तो realization concept क्या कहता है, कि आप उस transaction को उस वक्त, उस date पे record करो, जब वो actually में revenue जो है, आपको realize हो जा� तो यहाँ पर देखो, आप, आप क्या करते हो, chairs बनाते हो, ठीक है, आप यहाँ पर chairs बनाते हो, ठीक है, तो chairs बनाते हो, एक person आया, ठीक है, यहाँ पर एक person राम था, वो आपके पास आया, उसने क्या किया, यहाँ पर 5th of June को, ठीक है, आपके पास आया, उसने कहा कि मुझ जून को ही आपको जो है यहाँ पर इसके पैसे मिल गए. क्या मिल गए? यहाँ पर cash मिल गया. तो आप देख सकते हो कि transaction एक है. पर यहाँ पर fifth of June को order मिला. Fifteenth of June को sale किया. पर twenty fifth June को उसका पैसा हुआ. तो आपको यहाँ पर confusion होगी कि यह revenue किस date को किस time मेरे को मिल गई थी? अब किस date में इसको record करो? क्या fifth of June को? या fifteenth of June को? या twenty fifth June को? तो यहाँ पर जो हमारा realization concept है वो क्या कहता है? कि जब आपको जो revenue है actually मैं realize हो गई. Actually मैं realize का मतलब क्या होता है? या तो आपको वो पैसा मिल गया. या फिर आप आपका जो है उसके एक legal right हो गया उस पैसे को receive करने का उस date पे जो है आप record करो. तो यहाँ पर आप देख सकते हो. पैसा तो मिला है twenty fifth of June को. तो यहाँ पर जो fifteenth June है. ठीक है? Fifteenth June है. वहाँ पर आपने product को sale कर दिया है. तो इसका आपको पता है यहाँ अगर जब हमने sale कर दे तो हमारा एक legal right हो जाता है कि यह जो buyer है उससे हम पैसे को receive करें. तो आप जो है यह जो revenue हुई है उसको आप fifteenth of June को record करेंगे. Irrespective of कि आपको पैसा कम मिला कब नहीं मिला तो आप उसको revenue की तरह treat नहीं करोगे. आप सिर्फ वो देखोगे कि कब आपका जो है actually में पैसा आपको मिल जाना चाहिए था. कब वो पैसा आपका actually में realize हो गया. कब आपका legal right उस पैसे पे हो गया. उस date को आप जो है अपने books of account में revenue को record कर लोगे उसको जो है revenue मान लोगे. ठीक है? इसी concept की according जब भी कोई advance आ जाता है ना? Advance वगैरा जाता है तो आप उसको अपनी revenue नहीं मानते. ठीक है? आप उसको अपनी revenue नहीं मानते. आप revenue कम मानते हो जब जब वो actually में पैसा आपका हो जाता है. जब actually में आप sale कर देते हो तब उसको revenue मना जाता है. ठीक है? यहाँ पर देखो. Realization concept state that revenue from any business. Transaction should be included in the accounting records only when it is realized. ठीक है? उस revenue को हम अपनी books of account में तभी include करेंगे. जब वो जो है actually में हमें पैसा जो है realize हो जाएगा. ठीक है? वो actually पैसा हमें यहाँ पर मिल जाएगा या फिर हमारा legal right उस पर claim हो जाएगा. The term realization means creation of legal right to receive money. Realization का यहाँ पर meaning क्या है? कि एक legal right हमारे पास आ गया उस money को receive करने के लिए. ठीक है? Example भी दिया selling goods is realization. जब आप goods को sale कर दे तो वो क्या हो जाता है? हमारा realization हो जाता है. ठीक है? तो इस concept के according हम जो है अपने books account में जो है revenue को record करते हैं. तो यह हमारा कहता है realization concept. I hope आपको यह clear हो गया होगा. तो फटाफट से एक बारी chat box में मता दीजिए क्या आपको realization concept clear है? Okay? तो यह हमारी same example है जो मैंने आपको दी थी. ठीक है? तो अगर आप e-pdf notes चाहते हो इसके तो आप जो है attendance जरूर mark कर लीजिए. वहाँ से आपको जो है e-pdf notes मिल जाएगे जो हमारे lecture के हैं. ठीक है? तो next देखते हैं हमारा यहाँ पर accrual concept. अब accrual concept यहाँ पर देखो क्या कहता है? Accrual concept. Accrual concept हमें भी बताता है कि जब भी हम अपने business में किसी भी तरह की revenue ठीक है? ठीक है? या फिर expenses ठीक है? Expenses को यहाँ पर record करेंगे. तो कब record करेंगे? जब वो actually में occur हो जाएगे. हमने actually में वो expense या फिर revenue किया होग

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