BP accounting in depth PREPARATION OF FINANCIAL STATEMENT

PREPARATION OF FINANCIAL STATEMENT PART I

PREPARATION OF FINANCIAL STATEMENT PART I — a Bank Promotions accounting in depth video lecture on Learning Sessions.

14 Jun 2026 32:24 min 15 views
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तो शुरू करते हैं आज का अमारा टॉपिक यहाँ पर financial statements financial statements क्या होती हैं उसके बारे में हम डिटेल में यहाँ पर बात करेंगे तो यहाँ पर देखो जो companies होती हैं ठीक है जो companies होती हैं वो generally accounting one year के लिए करती हैं ठीक है, one year के लिए करती है, और जैसे ही one year का period खतम होता है, तो companies को यहाँ पर कुछ reports बनानी पड़ते हैं, या फिर कुछ statements बनानी पड़ते हैं, ठीक है, जिससे उन्हें companies की performance के बारे में पता लगता है, कि इस साल company की performance कैसे रही है, उसने उन्हें कितना profit कमाया, ठीक है, और इसे के साथ company को financial position के बारे में पता लगता है, कि company की इस साल financial position कैसी है, उसकी financial health कैसी है, ठीक है, तो इन statements को हम यहाँ पर क्या कहते है, financial statements, ऐसे statements जिसके, जिसके help से हमें जो है, किसी भी organization की earnings के बारे में पता लगता है, performance के बारे में पता लगता है, और उसकी financial health के बारे में पता लगता है, उसको हम यहाँ पर क्या कहते है, financial statement, ठीक है, तो यहाँ पर हम definition भी फड़ा फट से देख लेते हैं, तो यहाँ पर देखो क्या लिखा, financial statements are collection of summary level report, financial statement क्या है, उन statements का एक collection है, ठीक है, जैसे हमने बात की न, कि statements, कई सारी statements बनानी बढ़ते हैं, उनको एक साथ में हम क्या कहते है, financial statements, ठीक है, जो report करते हैं, किसके बारे में, organization के earning potential के बारे में, कि वो कितना earn कर पाए, company की earning potential कितनी है, कितना profit कमारी पारी है, और financial position के बारे में, कि इस particular date पे, financial statement जो है, किसी particular date पे बनाई जाती है, तो उस particular date पे, इस साल जैसे, company की financial health कैसी है, उसकी financial position कैसी है, अच्छी है या फिर बुरी है, उसके बारे में पता लगता है, और cash flows के बारे में पता लग रहा है, कि business में कितना cash आ रहा है, लेकिन, इस business में कितना cash जा रहा है, तो इनके बारे में हम detail में बात करेंगे, तो एक एक करके जानते हैं, यह होती क्या है, तो उससे पहले हम यहाँ पे समझते हैं, objectives of financial statement, अ�www, यहactives of financial statement, statements वो बनाने का objective क्या है? Company financial statements को बनाती क्या हुआ है? तो पहला objective हमारे यहाँ पर देखो क्या है? To provide useful information to management. अब देखो management क्यों होती है? जो company के operation को manage करते है, जो company को चला रही होती है. ठीक है? उसको हम क्या कहते है management? तो financial statement को बनाने का एक objective हमारा यह भी होता है कि जो हमारी management उसको useful information provide करी जाए ताकि उनको business के बारे में पता लग सके कि business में क्या चल रहा है? और company जो है? जो management है company से related planning कर पाए, controlling कर पाए और important decisions ले पाए ताकि business की आगे चलकर जो है growth है. ठीक है? उसके बाद देखो क्या है? To provide information to prospective investors about the financial health and earnings of the company. तो यहाँ पर दूसरा objective हमारा यहाँ पर क्या होता है? जो investors होते हैं. अब जो companies होते हैं वो generally देखो क्या कहते हैं? कि ज्यादा से ज्यादा investors को attract किया जाए ताकि वो जो है उनकी company में invest करें और उनके business की growth हो. तो financial statements को बनाया किसली जाता है? कि जो investors हैं, जो हमारी company में invest करना चाहते हैं, उनको जो है company के बारे में important information बताई जा सके कि company की profits कितने है? उसकी financial health कितनी है? ताकि जो investors हैं, वो हमारी company में जो investment करने वाले हैं, उनके related important decision ले पाए. जो investors होते हैं, जब भी वो किसी company में invest करते हैं, तो generally उस company की financial statements जरूर करते हैं, ताकि उन्हें एक idea मिल सके कि company actually में है कैसी है? ठीक है? तो यहाँ पर investors के लिए भी important information provide करते है financial statements. उसके बाद देखो next हमारा यहाँ पर क्या है? To provide information to the shareholders and public at large about. अब देखो जो company के already shareholders हैं, जिन्नों ने company के shares buy किये हैं, उनको भी तो जरूरी है कि company के बारे में shareholders को भी तो पता होना चाहिए न, उसके पैसे लगे हैं वाई. तो यहाँ पर shareholders को भी information provide करने के लिए जो है, यहाँ पर financial statement जो है, बनाई जाती है. ठीक है? Financial statement जो है यहाँ पर बनाई जाती है. तो यह हमारे क्या है? Objectives of financial statement. ठीक है? इन objectives को देखते हुए company जो है financial statement को बनाती है. उसके बाद next हमारा यहाँ पर देखो. Financial statement. Financial statement आप कितने तरह की होते हो? कौन-कौनसी हमारी financial statement होती है? So पहली हमारी जो financial, important financial statement है. वह हमारी यहाँ पर क्या होती अब आपको ऐसा कहे जिस स्कूलाई ठीक है तो ह्रदय सदस्यान का खूद तीक है पास उपक़्त है ... ऊपर केये पता स्वाद्य। क्योंकि, कोशिश शोहर के नाम से जलता स्कूलाई से प्रासोरपर्किश समिश्न होता है जो है बनाई जाती है किसी particular date पे किसी organization की जो है financial position के बारे में बताती है उसकी financial health के बारे में बताती है कि उसकी financial health कैसी है अच्छी है या फिर बुरी है जो investors होते हैं generally देखो जब भी उन्हें business अपने business में investment करनी होती है किसी company में investment करनी होती है तो उस company की financial statement जरूर देखते हैं वो देखते हैं कि company की financial position कैसी है अच्छी है कि बुरी है देखो जो investor वो चाहते हैं कि वो पैसा जो है ऐसी company में invest करें जहाँ पे उनका पैसा safe रहे तो वो कैसे पता लगेगा investor को जब वो financial balance sheet देखेंगे उस company की balance sheet में पता लग जाता है कि financial position अच्छी है अगर अच्छी है तो investor invest कर देते हैं उनको लगता है कि पैसा safe रहेगा अगर बुरी है तो वहाँ invest नहीं करते हैं अगर financial health बुरी है तो जाहर से बात नहीं है आगे जाके business काम नहीं करेगा वह बंद हो जाएगा तो यहाँ पर investor किसी की financial health देखने के लिए balance sheet को जो है study करते हैं तो balance sheet हमारी basically क्या हुए ऐसे statement जो किसी particular date पे financial health के बारे में बताते हैं किसी company के बारे में उसके बाद देखो क्या है income statement अब देखो जो investors होते हैं उनको financial position के बारे में पता लगे कि इसकी ठीक है चलो पैसा मेरा safe रहेगा उसके बाद investor यह भी देखते हैं कि company की जो profitability है वो कितनी है वो कितना profit कमा रही है कितना earn कर रही है वो भी पता करना ज़रूरी है तो investor उसके लिए क्या study करते हैं income statement तो income statement एक ऐसे statement होते है जिससे हमें किसी organization की earnings का पता लगता है profits का पता लगता है कि वो कितना profit कमा रही है क्योंकि investor को यह भी चाहिए कि वो जो है जहां भी पैसा invest करे उस पैसे से उसको ज़ादा से ज़ादा return आए ठीक है तो income statement से जो investor है वो एक तरह का earning capacity पता करती है किसी भी organization की performance पता करती है कि उसकी performance कैसी है ठीक है तो income statement generally हमें किसी organization की earnings के बारे में बताता है profit के बारे में बताता है उसके बाद third देखो हमारे क्या है cash flow statement अब cash flow statement देखो क्या होती है ऐसे statement जिससे हमें किसी organization इसके बारे में हमें אז से सब्सक्राइब बैलेंस और इन करें लुटवेस्ट उस सब्सक्राइब गया है इस सब्सक्राइब करते हैं किसी भी कंपनी को अइवैलाइट करने के लिए हमें इसको स्टडी करने में अनलाइज करने में हेल्प करती है ठीक है उसके बाद देखो क्लियर कट व्यू ऑफ कंपनी सफाइनेशल पोजीशन ऑन एक पर्टिकुलर डेट पर फाइनेशल पोजीशन के बारे में हमें पता लगता है बैलेंस चीज से और यह कैसे पता लगता है देखो इसमें ना कंपनी की जितनी भी एसेट्स है और जितनी भी लायबिलिटीज हैं उसको जो है शो किया जाता है तो आप हमें पता लगा एक स्टेटमेंट है जिसमें हमने एसेट दिखा दी कंपनी की कितनी है, company की liabilities कितनी है, उसको हमने show करते हैं. तो हमें एक idea मिल गया कि company की financial health कैसी है ठीक है तो यह हमारा होता है balance sheet एसी sheet जिससे, एसी statement जिससे हमने किसी financial position के किसी organization के financial position के बारे में पता लगता आया क्योंकि उस balance sheet में, उस statement में हम जो है जो है किसी organization की जितनी भी assets है और liabilities को show करते हैं तो उससे हमें एक idea मिल जाता है कि उसकी financial position है कैसी है तो यह हमारा था balance sheet अब देखो यहाँ पर क्या है components of balance sheet अब components of balance sheet क्या होते हैं अब देखो हमने balance sheet में यह तो देख लिया कि balance sheet में generally हम किसी company की जितनी भी assets हैं, जितनी भी liabilities हैं, उसको हम यहाँ पर show करते हैं, ठीक है, अब उसमें कौन-कौन से components होते हैं, कैसे balance sheet बनाये जाती हैं, उसको भी हम यहाँ पर देखेंगे, तो components में देखो, पहली चीज हमारी यहाँ पर क्या आते है, equity, ठीक है, यह हमारी क्या होती है यहाँ पर equity, टाइन antial condition और पवरान की मअमलिक बिटट को सकती है। èse का तरह से 90 बामि शीघजा धर्म में रखने की प्रमाणिकारी करती है। आपको डिक्री टीवन हमारी नेक्स कपुर मिनट क्लास है जैसे ऋनर होने पैसा नहीं लायबिलिटी के लिए एकशन से को दिया है उसको हम यहां पर क्या कहते हैं लाइबिलिटी जिसे एक्सांपल मैं आपको बता दूं जर्नली कंपनी जो है कुछ पैसा जो भी अपने बिजनेस को करती है ना तो कुछ पैसा तो ऑनर से मंगवा लेती है जो ऑनर से उसके हाथ जो भी फंड की रिक्वायरमेंट होती है वह बाहर बाले से लोल लेती है इस बैंक से लोन ले लिया इस जरनल पब्लिक से लोन लें उनको डिबेंचर इशू कर दिया तो वहां बाले से लोन ले लेती है तो ऑनर केượngवॉल्टब्स है जो company में पैसा लगाया हुए, जिनका business में पैसा है, उसको हम यहाँ पर क्या कहते हैं liabilities, तो यहाँ पर एक single line मैं आपको बताऊं, कि owners का जितना claim है business में, owner का claim मतलब कि owner claim करें कि हमारा पैसा है total इतना business में उसको equity कहोगे, और जो बाहर वाले जो creditors हैं, जिनने loan दिया business को जो owner नहीं है, उनका जो claim है business में, उसको हम यहाँ पर क्या कहते हैं liabilities, उसके बाद देखो क्या होता है assets, अब assets क्या है assets यहाँ पर हमारी क्या होती है, तो देखो generally, जो पैसा हमें equity और liabilities से मिलता है, जैसे 100 lakh रुपीज माल लो, आपको यहाँ पर दोनों से मिला ठीक है, 40 lakh हमारा किसका है, liabilities का और यहाँ पर, जो 60 lakh हमारा owners का, company इस पैसे को use करती है अपनी assets करीदने के लिए, किसके लिए assets करीदने के लिए, अब देखो companies जो हैं, उनको काम करने के लिए कुछ assets की जरूरत होते हैं, जैसे building की जरूरत है plant and machinery की जरूरत है तो वो जो पैसा उनके पास होता है उसकी help से बहुत साइड assets खरीदते हैं तो यहाँ पर, जो company investment करते हैं जो company investment करते हैं, जो अपने पैसे को जिस जगा पर investment करते हैं, जिन चीजों में investment करते हैं, उसको company की assets कहा जाता है, ठीक है यहाँ पर एक आपने equation, balance sheet equation देखी होगी, कि यहाँ पर जो हमारी equity होती है, ठीक है plus liabilities is equal to हमारा क्या होता है assets, यहाँ पर आपने equation पढ़ी होगी balance sheet equation के बारे में, कि जितने भी company की equities हैं और liabilities हैं उसको वो equal होती है assets की, क्योंकि इन दोनों से पैसा आता है और company spends को जो है, use करती है assets खरीदने के लिए ही, तो यह दोनों आपस में बराबर होते हैं, ठीक है तो यहाँ पर, यहाँ पर यह दोनों ही चीज़ें जो है, company की obligations होती है मतलब obligations समझे, company में यह पैसा लोगों ने लगाया है, company को यह दोनों ही बापस करने होते हैं, ठीक है तो यह हमारा क्या था, यहाँ पर components of balance sheet, अब इसको हम detail में यहाँ पर जो है, एक-एक करके पढ़ते हैं सबसे पहले बात करते हैं, equity की equity में कौन-कौन सी चीज़ें आती हैं तो mainly हमारी three चीज़ें हमने यहाँ पर देखी थी कि एक हमारी यहाँ पर आती है equity, then liabilities, then assets अब उनके भी हैं न, सब points होते हैं, उनको हम यहाँ पर देखो, equity में सबसे पहले आता है हमारा shareholder fund जो shareholders का fund है meaning मैंने आपको उपदादे, जिन्होंने जितना पैसा company में shareholders वालों का है तो उसमें पहली जीज़ हमारी यहाँ पर आती है share capital, अब share capital क्या होती है देखो जो company है जो company है, वो जितना भी पैसा, जितना भी company पैसा जो है, अपने shares issue करके कमा लेती है, ठीक है fund raise करती है उसको हम यहाँ पर कहते है share capital जैसे example के लिए company के पास 1000 shares थे, ठीक है, उसने जो है एक share जो है, कितने का था, 100 रुपीस का उसने market में इसको issue कर दिया तो यहाँ पर, इस shares को issue करके company ने total कितना पैसा कमाया 1 lakh, कमाया नहीं, sorry, यहाँ पर raise किया ठीक है, मंगवाए, fund raise किया कितने, 1 lakh रुपीस, तो यह जो 1 lakh रुपीस है ना इसको company जो है as a share capital दिखाई क्योंकि यह shareholders ने पैसा लगाया तो इसको हम share holder के fund में include करते हैं, ठीक है, तो इसको हम यहाँ पर क्या कहते है, share capital ऐसा कोई भी fund, ऐसा कोई भी पैसा जो company अपने shares को issue करके raise करती है, उसको हम यहाँ पर क्या कहते है, share capital उसके बाद देखो, next क्या हमारा reserve and surplus, अब reserve and surplus क्या होता है, देखो companies जो है generally जब वो पैसा raise करती है, तो अपने business के operations करती है, और business के operations जब वो करती है, business करती है, तो उनको कुछ ना कुछ profit होता है, अब यह जो profit होता है, ultimately किसका होता है, हमारे shareholders का, जो owners है, company का जो भी profit होगा, उसके owners का ही होगा ना तो यहाँ पर जो profit हो, वो shareholders का होता है, पर companies ज़रनली क्या करती है, जितना भी उसको profit होता है, वो सारा का सारा shareholders को नहीं देती वो कहती है उसका कुछ हिस्सा अपने पास बचा के रख लेती है, reserve करके रख लेती है, ठीक है, ताकि उस पैसे को business की growth के लिए further use कर पाए, और future में जाके अगर business को किसी भी तरह का loss हो जाए न, तो वहाँ पे जो है इस पैसे को use कर पाए, ठीक है, तो यहाँ पर उसी पैसे को जो company reserve करके रख लेती है, उसको हम यहाँ पर कहते है reserve and surplus, जिसे example के लिए मालो, company को किसी financial year में 50,000 का profit हुआ, उसमें उसने क्या किया, 30,000 रुपीज तो shareholders को दे दिये, पर क्या किया, 20,000 रुपीज जो है यहाँ पर, उसने बचा के रख लिये, वो जो है अपने पास रख लिये, तो company इसको जो है balance sheet में दिखाएगी, किस head के under, reserve and surplus के under, ठीक है, यह हमारा कहता reserve and surplus के under, और इसको हम shareholder fund में क्यों include करते हैं, क्योंकि देखो ultimately सारा का सारा profit जो है, वो shareholders का ही होता है, तो अगर यह reserve and surplus पड़ा भी हुआ है न, business के balance sheet में, तो ultimately यह पैसा तो हमारा shareholders का ही है, अगर company यहाँ पर बंद होती है न, तो यह पैसा shareholders को ही मिलेगा, तो इसलिए हम इसको shareholder fund में include करते हैं, उसके बाद देखो next हमारे क्या है, money received against share warrants, देखो यह ऐसे payments होती हैं, जो भी share warrants को खरीदते हैं, वो जो है यहाँ पर company के shareholder नहीं बनते, एक option होती है, कि जो share, जिनके पास भी shares हैं, share warrants हैं, उसको किसी भी time share capital में convert कर सकते हैं, shares में convert कर सकते हैं, पर यह जो है हमारे shareholders नहीं होते, तो इसके अगेंज जो भी पैसा आता है, वो भी हमारे shareholder funds में जो है, include होता है, ठीक है, उसके बाद देखो, next हमारा क्या है, यहाँ पर share application money pending allotment, ठीक है, तो यहाँ पर, यह हमारी दूसरी head होती है, जो हमारी चीज आती है, यहाँ पर equity के under ही आती है, जब भी company shares को issue करती है, तो वो generally क्या करती है यहाँ पर, सबसे पहले देखो, application मंगवाती है, ठीक है, application, ठीक है, application, जब भी company यहाँ पर shares issue करती है, तो वो जो पैसा है न, जितना भी मालो यहाँ पर company के shares का price अब 10 रूपीज है, company को एक share के बदले 10 रूपीज मिलने है, तो वो क्या करती है, इस पैसे को installment में मंगवाती है, सबसे पहले यहाँ पर application money मंगवाई जाती है, application money, application money क्या होती है यहाँ पर, ऐसी money ठीक है, ऐसी money जो company जब apply करते है, जब company ने यहाँ पर shares issue है, तो public सबसे पहले उसको apply करती है, तो company कहती है, जब आप apply करो, तो आप न share का कुछ price जो है, हमें यहाँ पर pay कर दो, तो यहाँ पर जब company जो public है, जब shares को खरीदने के लिए application देती है, उसके बदले में जो amount देती है, उसको हम यहाँ पर क्या कहते है, application money, जो application के वक्त आया होता है, तो यहाँ पर मानलो 10 रुपीस थे, 2 रुपीस जो है यहाँ पर, application जब shareholders यहाँ पर shares issue के थे, public ने यहाँ पर 2 रुपीस जो है application पर दे दिये, और company को जो है यहाँ पर shares की application money जो है, receive हो गए, अब next further आप क्या करते है, जैसे ही company के पास applications आ जाती है, ठीक है, उसके बाद company क्या करती है, यहाँ पर allotment करती है, allotment क्या होता है हमारा यहाँ पर, allotment क्या होता है, कि finally अब जो है company उनको shares जो है दे देती है, अब देखो पहली stage में सिर्फ applications आई है, ठीक है होता है न, अब जैसे government exam की बात करो, applicant कितने होते है, बहुत ज़ाने apply करते है, पर job किन को होते है, बहुत limited लोगों को मिलते है न, ऐसे ही company के shares भी limited ही होते है, तो उन्होंने application हो सकता है, बहुत ज़्यादा आ जाए, तो company सिर्फ जितने उनके पास shares है, उनको ही shares दे सकती है, allot कर सकती है, तो next step में जो है, जितने भी applications होती है, उनमें से company जो है select करते हैं लोगों को, और उनको shares allot कर देती है, और जैसे ही allotment हो जाती है, जैसे ही allotment हो जाती है, वो जो है यहाँ पर shareholder बन जाते है, क्या बन जाते है, यहाँ पर shareholder बन जाते हैं, और shareholder बन दे ही, बाकी का पैसा जो है, उनसे मंगवा लिया जाता है, cause के जरीए, इसके बाद cause मंगवा जाती है, ठीक है, वो process हम बाद में देखेंगे, तो ऐसे जो है company जो है, shares finally जो है, issue करती है, allot करती है, और shareholder person बनता है, तो यहाँ पर देखो, कई बार क्या होता है, कई बार क्या होता है, यहाँ पर, हम जब accounting करते हैं, तो एक limited period के लिए करते हैं, जैसे one year के लिए, तो कई बार क्या होता है, कि हम यहाँ पर shares issue कर देते है, example के मालों, कि हमने September में shares को issue कर दिया और 31st मार्च को 31st मार्च को हमारा financial year खतम हो गया 31st मार्च को हमारा financial year खतम हो गया और जो हमने allotment की यह ना, नही देखो application में इसमें आ गई सेप्तमबर में application में पर shareholder कब जाता है जब हम उसकी allotment कर देते है देते हैं तो अलॉटमेंट जो है ना वह नेक्स्ट फाइनेशियल यह में मालों यहां पर महीन में महीने में जो है नेक्स्ट में जो है यहां पर अलॉटमेंट की नेक्स्ट फाइनेशियल यह में तो यहां पर देखो शेयर होल्डर वह अगले अगले financial year में बनेगा जब उसको finally share जो है allot के जाएगे पर application का पैसा उसको इसी financial year में company को मिल गया है तो इस application को पैसे को भी उसको जो है अपनी balance sheet में show करना पड़ेगा ना उसके बास पैसा आया है तो उसको वो कहाँ पे show करते है share application money जो share के application के बगत जो पैसा आया है और pending allotment उसकी जो है allotment pending है उसके head में यहाँ पर show करती है और यह हमारा equity के under ही आता है क्योंकि ultimately इनको हमने बाद में shareholder ही बना देना है तो यह shareholder funds के under ही हमारा equity के under ही आता है यह भी हमारे owners ही बन जाते हैं अगले साल में जाके बन जाते हैं तो यह हमारा overall था equity I hope आपको यहाँ तक clear हो गया होगा कि equity में हमारी कौन कौन सी चीजे include होती हैं अब देखो इसको हमने shareholder fund में क्यों नहीं include किया बैसे देखो है तो यह shareholder का fund में ही पैसा तो उसी में आ रहा है टीके पर shareholder fund में इस ही नहीं include किया क्योंकि यह अभी तक shareholder जो है वो बने नहीं ठीके वो shareholder जो है हमारे यहाँ पर बने नहीं है पर ultimately यह नो को हम अगले साल में जो है shareholders बना ही देंगे तो इसलिए हम इसको equity के under जो है show करते हैं ठीक है I hope आपको यहाँ पर equity का meaning clear हो गया होगा हमने detail में जो है समझा कि equity आकरिमार होती क्या उसके बाद देखो क्या है next हमारा non current liabilities तो next object हमने यहाँ पर देखा था liabilities ठीक है मतलब कि equity के बाद next component हमने क्या देखा था liabilities और liabilities जो है हमारी दो तरीके के होती है liabilities हमारी यहाँ पर क्या होती है दो तरीके के होती है एक हमारी non current liabilities और एक हमारी क्या होती है current liabilities ठीक है तो liabilities का meaning हमने आपको बताया था कि जब जो claim, जो claim business में बाहर वालों का है, owner के इलावा जितनों, जितनों ने company में पैसा लगाया हुआ है, वो company के लिए क्या होती है, liabilities होती है, तो liabilities क्या होती है, उसको बापस भी तो करना है न, company जो है यहाँ पर, जो liabilities है, जो loan वगरा लिया है, किसी न किसी time period के लिए लिया है, उसके बाद उन्हें जो है बापस करना होता है, तो उसके base पर, यहाँ पर liabilities को हम two types में divide करते हैं, एक हमारा होता है non-current liabilities, और एक हमारा होता है current liabilities, उसके बारे में भी हम detail में study करेंगे, � या साल से ज़्यादा में करने, उसको हम यहाँ पर क्या कहते है, non-current liabilities, ठीक है, हमने payment के बिहापे उनको जो है divide किया है, कि कितने साल में जो है, यह liabilities का पैसा company को जो है बापस करना बढ़ता है, तो generally company का एक accounting period, accounting period one year का होता है, तो एक accounting period में कोई भी ऐसी liability, जिसकी payment आपक के बाद करोगे, जैसे ही five years खतम होगे तब करोगे, तो यह जो liability है ना, यह company की जो liability है, वो जो है यहाँ पर हमारी non-current liabilities होती है, ठीक है, तो अब non-current liabilities में देखो कौन-कौन से चीज़े हमारी आ जाती हैं, उसको भी हम detail में यहाँ पर देखते हैं, तो पहली चीज़ हमा यहाँ पर आप लिख भी सकते हैं, लोन, ठीक है, जो लंबे समय के लिए लोन लिया गया है, जैसे example के लिए bank से, company ने जो है five years के लिए, five years के लिए जो है यहाँ पर लोन लिया है, ठीक है, तो cash लिया है, पैसा मिला है हमें, वो हमारी यहाँ पर क्या होते है long term borrowings, long term borrowings, उ यहाँ पर deferred tax liabilities कहते हैं, ठीक है, और यहाँ पर deferred tax assets भी आगे आएंगी, ठीक है, तो उस change के विशेष की वज़े से जो difference आता है, उसी को हम यहाँ पर क्या है deferred tax liabilities, जैसे example के लिए आपको बताओ, example के लिए बताओ, यहाँ पर देखो, एक depreciation expense होता है, depreciation expense होता है, ठीक है, और जो income tax है, जो income tax वाले, ठीक है, वो क्या कह रहे हैं, कि आप जो है इस asset पर 60% का जो है, यहाँ पर depreciation charge करो, यहाँ पर देखो, income tax वाले बोल रहे हैं कि आप 60% करो, और corporate rule कह रहा है 30%, तो हमने यहाँ पर profit calculate किया होगा 30% के असाब से, और income tax वालों के नजर में जो है profit किसी वजह से, किसी वजह से जो है हमारा profit जो है, मतलब tax जो है increase हो जाए, मालो कि corporate rules के according हमारा जो profit आया था, वो 10,000 आया था, पर income tax rules के according जो profit हमारा आ रहा है, वो कितना आ रहा है, 20,000, तो यहाँ पर देखो, हमारी जो income tax rules के वजह से, जो difference हुआ, उसकी वजह से हमारी tax liability ब हमारी 1000 जो है tax liability increase हो गई, तो इसी को हम यहाँ पर क्या कहते है, deferred tax liability, ठीक है, इसी को हम यहाँ पर क्या कहते है, deferred tax liability, तो यहाँ पर ultimately जो corporate rules हैं, और हमारे income tax के rules हैं, उनके rules की difference के वजह से अगर tax liability में कोई फरक आता है, तो वो हमारे यहाँ पर deferred tax liability होता है, उसके बाद � यहाँ पर यहाँ पर यहाँ पर company को एक liability है, क्योंकि इसको 5 crore रुपे जो है, pay off करने है, पर देखो यह क्या है, loan, ना हमें इसको cash मिला है, ना हमें हमें हमें इसने जो है loan दिया है, तो इसको, इस तरह की liability इसको, ठीक है, जो हमें cash की form में नहीं मिली है, पर हमें pay off करनी है, ठीक है, तो इसको हम यहाँ पर other long term long termy الي agrees now हमें यह चीज पर करनी है कि फूचर में हमें जो है इतनी प्रोटेट करनी है तो वह जो है यहां पर प्रवीजेंस क्रिएट कर लेते हैं तो आपको कंसरवेटसम कंसप्ट के बारे में तो इसके अकॉरडिंग किया है कंपनी को जो भी यहां पर expect हो रहा है ना कि future में जाकर यह loss हो जाएगा ठीक है जितनी भी उसको लग रहा है कि future में जाकर chances हैं कि हमें यह loss हो जाएगा तो company क्या करती है उसके लिए पहले से ही provisions create करके रख लेती है जिसे example दे मैं आपको बता दू यहाँ पर provident fund जो provident fund होता ह तो company को पता है कि इतना provident fund तो हमें employee को pay करना है तो वो क्या करती है यहाँ पर provident fund के लिए पहले से ही provisions create करके रख लेती है ठीक है ताकि जो future में जब future में यहाँ पर पैसा देने की बारी हो तो हमारे पास funds available हो और उस पैसे से जो हम यहाँ पर अपनी liability को जो है यहाँ पर pay के लिए बनाई जाती है अब जो retirement fund हमारा provident fund है वो company को लंबे समय जो है लंबे समय में pay off करना है तो इसको हम यहाँ पर long term provisions में जो है include करते हैं उसके बाद देखो next हमारा यहाँ पर क्या है current liabilities अब यहाँ पर current liabilities क्या होती है तो देखो हमने non current liabilities के बारे में पढ़ा था non जो है within within one year के period में कर देते हैं मतलब एस एक साल के अंदर मतलब जो हमारा accounting period है उसके अंदर अगर आप जो है किसी current liabilities की पेमेंट कर रहे हो तो वह आपका यहां पर क्या हो जाता है current liabilities example लिए यहां पर short term borrows क्या होता है हमारा short term borrows short term borrows आप लोगों को पता है कि जो थोड़े समय के लिए लोन लिया जाता है जैसे कि over draft जो banks हमें एक over draft की facility प्रवाइड करती है ना उसमें जो है इसमें हम जो है अपने बैंक से अपने अकाउंट में से मलूं जितने पैसे उससे ज्यादा पैसे जो विड्रॉप करवा सकते हैं ठीक है तो उसमें बैंक ने एक तरह का में लोनी देती है होता है और जो ऑफरड्राफ्ट के पैसे होते हैं वह लोग हम एक तौर महिना में माना बापर कर लेते हैं तो यहां पर देखिए यह हमारी लाइबिलिटी है ह!租रिसेशन-करर्ति incivile.com रितीयते हैं पैसा में मिला तो हमारी लाइबिलिटी है, वह बैंक के भी लायबिलिटी है उस कार्ड पैंट करना सूभी थी, तो वे हमार मतलब कि उसका payment हम one year के period में करी देंगे example मैंने overdraft के आपको बता दी थी तो वो हमारे क्या होते है short term borrowing चेर loan की form में मिले उसके बाद देखो next हमारा यहाँ पे क्या है trade payables अब trade payables क्या होता है इसको हम detail में study करते है trade payables तो देखो generally generally जब company यहाँ पर कोई भी चीज पर्चेस करते है जैसे raw material पर्चेस किया तो वो दो तरीके से पर्चेस करते है एक क्या करते है cash basis पे और एक क्या करते है यहाँ पर credit basis पे एक cash basis पे और एक हमारा credit basis पे cash basis पे क्या होता है कि company ने यहाँ पर समान खरीदा और साथ के साथ cash pay कर दिया, और credit basis क्या होता है, कि company ने यहाँ पर समान खरीदा, पर उसकी जो payment है, उसने कहा कि हम कुछ time बाद जो है आपको कर देंगे, जैसे 3 months, 2 months, इस time period में जो है payment कर देंगे, उसको हम यहाँ पर क्या कहते है, credit basis, ठीक है, तो यहाँ पर देखो, जैसे ही company को होता है, कि यह जो है पैसा है, वो बापस करना है, उसको liability बन जाती है, कि इसकी जो है payment company को करने पड़ेगी, तो यहाँ पर जो creditor होते हैं, जो person जो हमें उधार पर समान बेजते हैं, तो वो कई बर क्या करते हैं, यहाँ पर return में sign करवा लेते हैं, हमें जो है, हम से जो में दूँ ठीक है तो वहाँ पर एक statement पर ये लिखवा ले जाता है कि company ने ये समाने इस person से करीदा था और company ने कहा है कि हम three months में जो है इसको payment कर देते हैं तो यहाँ पर जो return में लिखवा लेते हैं जो यहाँ पर return में लिखवा लेते हैं उसको हम यहाँ पर क्या कहते हैं bills paper ठीक है अब company ने return में लिख दिया तो company को उसकी अपनी balance sheet में show करना है तो वहाँ पे वो क्या है इसको as a bills paper जो है show करती है मतलब कि ऐसा एसा creditor जिन्नों ने return में हमसे लिखवा लिया होता है उसको हम यहाँ पर क्या कहते हैं bills paper ठीक है और कुछ creditors ऐसे भी होते हैं जो कि हमसे return में नहीं लिखवाते ठीक है और कुछ creditors हमेरे ऐसे भी होते हैं जो क्या करते हैं return में नहीं लिखवाते हैं वो simply कहते हैं कि चलो आप three months के क्लिक करना चाहते हो तो थ्री में से के बाद आप पेमेंट कर देना आप वह जो पर्सनल होते जो हम से रिटरंड में नहीं लिखवाते हैं उसको हम ऐडिटर्स वृद्ध इंटरवेशिट में को हम यहां पर क्या कहते हैं एगर दोनों भी में आपको payment करनी है, दोनों ही case में आपने जो है, उधार पे समान करीजा था, और आपको यहाँ पर payment जो है, करनी पड़ेगी, तो इस दोनों को एक साथ हम यहाँ पर क्या कहते है, trade payables, इन दोनों को एक साथ हम यहाँ पर क्या कहते है, या फिर आप इसको अकाउंट पेबल भी कह सकते हो या फिर आप इसको जो है यहाँ पर अकाउंट पेबल भी कह सकते हो ठीक है यहाँ पर आप जो है इसको अकाउंट पेबल भी कह सकते हो तो यह हमारा तरफ ट्रेड पेबल एक्स थोड़ी पैसा रोड की फॉर्मी नहीं सिर्फ ओन्द्स दिल्ली ओधी श्रीत और एस्टपर्ट कि यहां तो आपका कस्टमर से किसी तरह का लून नहीं लिया अगर लोन लिया होता तो आप शोट टर्म बॉर्यमिंग में शो करते पर आपने लोन लिया नहीं है आपको तो एडवांस मिल गई तो आपको पर शो तो करना है ना तो आप इसको कि इसमें जो कर रहे हैं अदर क्रंट लायबिलिटीज में जो भी अडवांस आपके पास कस्टमर का आ गया है ठीक है उसके बाद देखो क्या शॉट टर्म प्रोवीजन यह तो यह हमारा प्रोवीजन से ही रिलेटेड है कि कंपनीस को जब कोई पेमेंट करनी होती है प्यूचर में तो वह क्या करती है उससे लेटर पहले से ही प्रोवीजन बना लेती है ठीक है जैसे टैक्स पर करना तो इसके लिए प्रोवीजन क्रिएट कर लेती है तो शॉट टर्म प्रोवीजन जो कि शॉट टर्म के लिए बनाई जाती है जैसे tax के लिए provision ठीक है tax के ऊपर company provision बनाती है वह short term के लिए होती है और one accounting period में उसकी payment वगैरह कर दी जाती है यहां पे short term provision तो यहां तक हमने basically क्या क्या सीखा देखो financial statement के बारे में सीखा हमने देखा कि कौन कौन से हमारे financial statements होती हैं उसके बाद हमने balance sheet को start किया कि important financial statement होती है उसके हमने लाइब्रेटीज के बारे में पढ़ लिया तो यहां तक आज का जो हमारा टॉपिक ओवर होता है

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