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WORKING CAPITAL MANAGEMENT — a Bank Promotions accounting in depth video lecture on Learning Sessions.
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तो स्टार्ट करते हैं यहाँ पर, सबसे पहले हम यहाँ पर working capital का meaning समझ लेते हैं, कि working capital क्या होता है, generally आप लोगों को पता है कि जब भी organization के बाद finance होता है, उनके पास जो भी money होती है, financial resources होते हैं, उसको दो काम के लिए यूज़ करते हैं, एक तो एक पैसे का एक हिस्सा, व car को बनाने के लिए उसे machines की requirement होगी, तो उसके पास जितना भी capital होगा, जितना भी उसके पास पैसा होगा, उसका एक हिस्सा हो क्या करेगा, यहाँ पर machine खुरीदे में लगा देगा, और दूसरा हिस्सा, दूसरा हिस्सा वो यूज़ करेगा इस car को बनाने में, क्योंकि इस specifically वो funds होते हैं, जो कि company use करती है, अपनी day to day activities को finance करने के लिए, तो working capital management का meaning है, जो भी company के पास working capital है, उसको अच्छे तरीके से manage करना, ताकि वो अपने working capital को maximum use कर पाए, अच्छे तरीके से utilize कर पाए, ताकि उसका जो profit है, वो increase हो जाए, तो पूरे chapter में हम यहाँ पर working capital के बारे में ही पढ़ेंगे, और उसके management के बारे में पढ़ेंगे, सबसे पहले यहाँ पर working capital का meaning समझ लेते हैं, the capital required by a business to meet its day to day expenses is known as working capital, यह मैंने आपको शुरू में बता दिया, कि जो day to day operations करता है ना business, उसको करने के लिए जो expenses करने पड़ते हैं, उसे हम यहाँ पर क्या कहते हैं, working capital, next एक हो क्या है, types of working capital, तो types of working capital, शुरू करने से पहले मैं आपको यहाँ पर बता दू, कि जो organizations हैं, वो जो working capital हैं, वो अपने current assets की form में रखते हैं, यानि कि जो company के पास जितने भी current assets होते हैं, उसकी value को हम यहाँ पर क्या कहते हैं, working capital, बिजनस के operations को करने के लिए ही, organization जो हैं यहाँ पर अपने current assets को इकठा करते हैं, जैसे example के लिए हमारा एक current asset क्या है, cash, टिके, cash का use हम किसले करते हैं, ताकि हम उसको day to day जो भी हमारे expenses होंगे, wages वगैरा पे करने के लिए हम use करते हैं, कई बार आपने यहाँ पर debtor भी देखा होगा, debtor भी हमारा कैसे arise होता है, जो हम business यहाँ पर करते हैं, जो car हमने, मालो हम car बेसते हैं market में, तो जब हमने उधार पे बेचा होगा, तब ही हमारा debtor यहाँ पर बना होगा, तो working capital की जो amount होती है, उसको हम current assets की form में ही रखते हैं, तो अगर आपको जानना हो, कि organization की working capital कितने है, तो आप उसके जो है current assets देख लीजिए, आपको पता लग जाएगा, ठीक है, तो उसके बेस पर हमारे जो working capital वो दो तरीके के होते हैं, एक हमारा होता है यहाँ पर gross working capital, gross working capital देखो क्या होता है, gross working capital is the total value of the company's current assets, जितने भी company की total current assets है, उसे हम यहाँ पर क्या कहते हैं, gross working capital, clear है, तो balance sheet में, जो balance sheet के end में, जितना भी आपको current asset के head में, आपको जितने भी amount दिखे, debtor दिखे, inventory दिखे, cash दिखे, उन सभी को एक साथ हम यहाँ पर क्या कहते देते हैं, gross working capital, next एक हो क्या है, net working capital, अब यह net working capital क्या होता है, तो यहाँ पर देखो, net working capital is the difference between the current assets and the current liabilities of the company, and it can be negative or positive, तो net working capital क्या होता है, जब हम अपनी current assets में से current liabilities को minus कर देते हैं, तो उसके बाद वाला जो हिस्सा बचता है, वो हमारा क्या होता है, net working capital, net working capital का मतलब होता है, कि जो organization को actually में जो पैसा चाहिए, अपनी business की day to day activities को करने के लिए, अब यह कैसे possible होता है, देखो यहाँ पर मैं example के साथ समझाओंगा, तो यहाँ पर देखो, माल वे कंपनी है, जिसको total जो है, 10,000 रुपीज जो है, चाहिए अपने business operations को करने के लिए, चलो एक लाख रुपी कर लेते हैं, तो यहाँ पर देख सकते हो, क्योंकि हमने raw material यहाँ पर उधार पर खरीद ले है, तो हमें इसके पैसे देने की जरूरत नहीं है, तो actually मैं हमें कितने पैसों की requirement है, अपने business activities को करने के लिए, सिर्फ और सिर्फ 90,000 को, तो इसी को हम यहाँ पर क्या कहते है, next एक हो क्या है, working capital management, अब working capital management क्या होता है, working capital management involves management of both current assets and the sources of finance them, तो working capital में हम एक तो यह चीज़ manage करते हैं, कि हम अपने current assets को अच्छे तरीके से manage करें, हम उसको अच्छे तरीके से utilize करते हैं, उसका कोई भी wastage नहीं होने देने, साथ के साथ, यह जो current assets हमने जिन sources से gain कियें, जिन sources से हमने current assets बनाए हैं, हमें उसे भी manage करना होता है, जैसे कि आप देख सकते हैं यहाँ पर, जब हमने बात की थी, यहाँ पर जब हमने credit पर खरीदा था, जब हमने यहाँ पर credit पर खरीदा था, तो यह जो हमारा 10,000 की value थी, वो हमारा क्या था, यहाँ पर current assets में include हुआ था, और इसका source क्या था, वो supplier, जिसने हमें यहाँ पर उधार पे समान बेचा था, clear है, तो यहाँ पर देखो, current assets, जो हमने यहाँ पर stock खरीदा, जैसे raw material का stock खरीदा, तो यह हमारे लिए क्या होगा, current assets होगा, तो working capital management में, हमें इसे तो manage करना ही है, साथ की साथ, यह जो source, जिससे हमें यह पैसा stock मिला, ठीक है, जो हमारा current assets, जिस source से create हुआ, ठीक है, उसको भी हमें proper तरीके से manage करना है, तो working capital management में हमें ध्यान रखना है, कि हमें कहां कहां से, कौन कौन से current assets लेने है, और sources हमें यहाँ पर क्या रखने है, तो वही हम यहाँ पर देखेंगे, next एक हो क्या है, working capital cycle, तो working capital management को समझने के लिए, अच्छे तरीके से समझने के लिए, हमें working capital cycle के बारे में पता होना चाहिए, कि working capital cycle क्या होता है, जर्ने में मैं आपको बता दूं, कि raw material को खरीदने से लेकर, उसको finish product में बनाने से लेकर, उससे जो पैसा आएगा, सेल करने के बाद जो पैसा आएगा, उस पूरे period को हम यहाँ पर क्या कहते हैं, working capital cycle, मतलब कि, मालो आपने क्या किया यहाँ पर, first of January को, ठीक है, first of January को आपने यहाँ पर raw material खरीदा, ठीक है, उसके बाद क्या हुआ कि, first of February को आपने यहाँ पर, उसको finish product में तब्दील कर लिया, उसके बाद देखो next में, आपने first March को, उसको जो है यहाँ पर sale कर दिया, आपने उसको sale करके, उससे जो है पैसे ले लिया, आपने cash sales की उससे पैसे ले लिया, तो यह जो time period है न, जिसमें आपने raw material को, finish product में बनाया, और sale किया, इस time period को हम क्या कहते हैं, working capital cycle, clear है आपको, clear है, एक बार यहाँ पर मुझे chair box में ज़रूर बता दिजिगा, क्या आपको working capital cycle का meaning clear है, normally अगर हम businesses की बात करें, तो हर business में, यही हमारा working capital cycle होता है, जैसे कि सबसे पहले, हम यहाँ पर क्या करते है, raw material purchase करते हैं, फिर उस raw material से क्या करते हैं, हम उसको finished product में convert करते हैं, यह पूरा हम cycle एक समझेंगे, यह जो working capital cycle है, हर business organization में चलता ही रहता है, clear है, तो सबसे पहले हमने raw material purchase किया, उसके बाद उसको finished product में convert किया, उसके बाद हमने क्या किया, इसको sale किया, अब देखो, sale भी दो तरीके से ही होती है, एक हमारी cash sales होती है, एक हमारी credit sales होती है, अगर तो हमने cash sales कियोगी, तो यहाँ पर हमें पैसा मिल जाएगा, अगर हमने by chance यहाँ पर credit sales कियोगी, तो जब credit period हमारा खतम हो जाएगा, तब हमें यहाँ पर पैसा मिल जाएगा, तो यहाँ पर आके, इस point पर आके, जब हमने finally हमारे पास पैसा आ गया, चाहे हमने credit पर बेचा हो, चाहे हमने cash sales पर बेचा हो, यहाँ पर आके हमारा working capital cycle जो है, वो over हो जाता है, इस पूरे cycle को हम यहाँ पर क्या कह देते हैं, working capital cycle, next एक हमारे यहाँ पर, next एक paragraph में बिल्कुल सेम बाते कही हैं, जो मैंने आपको यहाँ पर समझाईए, कि कोई भी enterprise हो, उसमें सबसे पहले यहाँ पर raw material को purchase किया जाता है, processing की जाती है, फिर उसको finish good में बनाया जाता है, फिर उसको goods को sale किया जाता है, उससे cash receive किया जाता है, और इसी को हम यहाँ पर क्या कह देते हैं, working capital cycle, अब देखो next point हमारा कहा है, the length of this cycle depends on, अब यह जो working capital हमारा cycle है, उसकी length कितनी होगी, वो कितना लंबा हमारा cycle होगा, कितना लंबा period होगा, वो किस चीज़ों के depend करता है, तो यहाँ पर हमारे तीन important points है, जिन पर हमारा working capital cycle जो है, वो depend करता है, किसी भी organization का जो working capital cycle है, वो कितना length होगा, या फिर short होगा, वो depend करता है इन तीन factors पर, सबसे पहले देखो क्या है, the stocks of raw material required to be held, अगर किसी organization को अपने पास, raw material का कितना stock जो है, वो रखना पड़ता है, जितना ज़्यादा stock उसे ज़्यादा रखना पड़ेगा, उतना ही time लगेगा, उस raw material को finished product में convert करने, और sales करने में, आप ही सोच कि देखो, अगर कोई company यहाँ पर, सिर्फ और सिर्फ 10 units ही raw material के purchase करती है, और उसी को बना के market में sale कर सकती है, और इसी के comparison में एक ऐसी है, जो कि 1000 units raw material खरीदती है, उसको store करती है, और उससे जो हो finished product बना के market में sale करती है, तो आप देख सकते हो कि इसका जो working capital cycle होगा, वो ज़्यादा होगा, as comparison to हमारे इस company के, clear है आपको, तो raw material का store कितना हम रखते हैं, उस पे भी depend करता है, लेकिन देखो कि हम work in product, which in turn depends on the process involved in manufacturing, processing that convert the raw material into finished good, अब देखो, राउ material को रखने के साथ साथ, बनाने में महीनों लगते हैं, सालों लगते हैं, तो उस case में हमारा जो working capital cycle है, वो ज़्यादा होगा, और कोई ऐसा product है, जिसको हम एकी दिन में बना लेते हैं, तो उसका working capital cycle जो है, वो कम होगा, अगर हम यहाँ पर अपने product को credit बेजते हैं, तो हम maximum कितना time के लिए credit पे दे दे, तीन मेंने, दो मेंने, तो उसके ऊपर भी depend करता है, कि हमारा working capital cycle कितना बड़ा या छोटा होगा, clear है, अब यह हमने क्यों यहाँ पर पढ़ा है, तो उसका reason देखो क्या है, कि अगर इसी organization का जो working capital जितना ज्यादा होगा, उसे उतना ही ज़्यादा working capital रखने की requirement है, लिकि अगर मालों यहाँ पर एक साल का किसी का working capital cycle है, तो उसको एक साल के लिए पैसे रखने पड़ेंगे, एक साल के जो expenses होंगे, उनको cover करने के लिए उसे पैसे रखने पड़ेंगे, उसी के comparison, अगर कोई यहाँ पर जिसका working capital cycle सिर्फ one month का है, तो उसे यहाँ पर कम पैसे रखने पड़ेंगे, तो जितना ज़्यादा working capital cycle, उतना ज़्यादा working capital की requirement, तो इसके उपर भी MCQ बन सकते हैं, तो आपने यहाँ पर ध्यान रखना है, clear है आपको, next point देखो क्या है, current assets, working capital of a firm, यह जो हमारी organization है, हमने बात की, कि जो working capital होती है, वो हम current assets की form में रखते हैं, अब यह किस पर depend करता है, मतलब organization किन factor की वज़े से, किस organization, कौन organization यहाँ पर, अपनी ज़्यादा assets रखते हैं, working capital ज़्यादा रखते हैं, और कौन से organization यहाँ पर कम रखते हैं, तो यहाँ पर कुछ factors हैं, जिनके base पर organization decide करती है, कि उन्हें working capital ज़्यादा चाहिए, या फिर कम चाहिए, अगर आपको यहाँ पर पता लगाना हो, कि इस type के organization को, working capital ज़्यादा रखने की ज़्यादा है, या फिर कम रखने की ज़्यादा है, तो आपको जो है, यह factor, condition factors एक बारी, देख लेने है, उसके base पर ही आप यहाँ पर decision making करोगे, तो सबसे पहला देखो क्या है, nature of business, वर्किंग capital कितनी रखी जाएगी, वो depend करता है, business का nature कैसा है, जैसे example के लिए, public utility undertaking, जो public departments होते हैं, जैसे कि electricity हो गया, water supply department हो गया, उनको working capital की requirement कम होती है, ऐसा क्यों होता है, जर्नली, जो हमारे यहाँ पर companies होती हैं, जो public utility services हो, वो cash basis पर services देते हैं, यानि कि, वो credit उधार पर, जब हम बिजली बिल भरते हैं, तो हम जैसे ही, बिजली बिल आया, हमें उसको cash देना ही बरता है, हम नहीं कहते हैं कि हमें 3-4 महीने का time यहाँ पर दो, तो सबसे पहला reason क्या है, कम रखने का working capital, यह cash basis पर काम करते हैं, तो credit basis पर जो period आओ, वो कम हो जाता है, तो इनका working capital कम ही रहता है, जिसकी वज़े से इन working capital की requirement कम होती है, next देखो क्या है, यह क्या है, services supply करते हैं, यह जो हमारी business है, public utility services, वो generally क्या करते हैं, services बेजते हैं, services देते हैं, तो services उन्हें store करने की ज़रूरत तो नहीं होती है, उनका stock हमें maintain करने की ज़रूरत नहीं होती है, तो उनको किसी भी तरह की investment नहीं करनी होती है, हमारे inventories में, और receivables, clear है आपको, तो यह दो main reason, पहला कि वो cash basis पे deal करते हैं, दूसरा कि उन्हें कोई भी inventory maintain करने की ज़रूरत नहीं होती है, पर इसके opposite जो हमारा यहाँ पर trading and financial firms होते हैं, जो trading companies होते हैं, जो goods manufacture करके market में बेसती हैं, तो generally आप देखो यह deal करते हैं, credit पे भी deal करते हैं, और cash basis पे भी deal करते हैं, तो इनको यहाँ पर working capital की requirement है, वो ज़्यादा होती है, इनको inventory भी maintain करने की रखनी परती है, ताकि जैसे ही sale का order आए, वो यहाँ पर sale कर पाए, तो इनको इन्वेंट्री में भी investment करनी परती है, तो इनका जो working capital की requirement होती है, वो ज़्यादा होती है, as comparison to हमारा यहाँ पर public utility services, next देखो कहाँ size of business, यह बिल्कुल simple point है, अगर business जितना ज़्यादा बड़ा होगा, उसको उतनी ही working capital की requirement होगा, और जो business जितना ज़्यादा चोटा होगा, उसकी working capital की requirement होगी, वो कम ही होगी, अगर next देखो कहाँ production policy, अब यहाँ पर production policy पर भी depend करता है, कि जो organization है, वो उसकी production policy कैसी है, जैसे example मैं यहाँ पर बता दू, अगर कोई यहाँ पर organization ऐसी है, जो कि यह चाहती है, कि जो उनका production है, वो smoothly चले, मतलब कि वो पूरे साल एक ही तरह की production करे, ऐसा नहीं हो कि season आया तो हमने जाधा production करने चालो कर दी, और अगर season नहीं है तो हमने कम production करने चले, तो वो क्या करते हैं, वो हर हर चाहे season हो चाहे season ना हो, वो एकी amount से production करते हैं, जिसकी वज़े से क्या होता है, जब तो season होता है, तो उनकी inventory वो कम store करके रखते हैं पर जब off season होता है तो उनका जो stock उनके बास बहुत ज़्यादा इकठा हो जाता है जिसकी वज़े से उनका जो पैसा होता है, fund होता है वो stock में जो है, वो stock में लग जाता है ज़्यादा से ज़्यादा पैसा है तो ऐसी companies जो production policy को smooth रखना चाती हैं तो यहाँ पर season की हिसाब से नहीं production करना चाती है उनको working capital की requirement है वो ज्यादा होती है क्या होती है हमारे यहाँ पर working capital की requirement ज्यादा होती है क्योंकि season के हिसाब से यहाँ पर stock बढ़ता कम रहता है next एक वो कहा seasonal variations कई बार ऐसे product भी हम manufacture करते हैं जिनके उपर season का बहुत ज़दा effect पड़ता है तो यहाँ पर देखो जब season आएगा अगर यहाँ पर मालो सर्दियों का season है तो वुलेर भी वो product होंगे वो ज़्यादा बिकेंगे तो उस case में अगर आप sweater में deal करते हो तो उस case में आपको जी मैंने point आपको पहले ही clear करवा दिया कि किसी organization का working capital cycle कैसा है उस पे भी depend करता है कि उसको working capital कितनी maintain करके रखनी पड़ेगी अगर working capital ज़्यादा है तो उनको working capital requirement ज़्यादा है और अगर working capital कम है तो उसको कम है तो यह हमारे कुछ points है कुछ factors हैं जो की effect करते हैं forms को जब भी वो working capital को measure करती है ठीक है कितनी उनको working capital रखनी है तो उन्हें यह points को जो है consider करना ज़रूरी होता है तो फ़ड़ा बड़ से एक बारे चैर बॉक्स में भी बता दिये कि आपको यहां तक यह points clear है बहुत important है इन में से काफी MCQ यहां पर बन सकते हैं तो फ़ड़ा बड़ से एक बारे चैर बॉक्स में ज़रूर बता दिये कि आपको यहां तक points clear है फ़ड़ा बड़ से एक बारे चैर बॉक्स में बता दिये कि आपको यहां तक points clear है clear है आपको यहां पर मैंने आपको एक link share किया है उस link पे click करके आप जो है अपनी attendance जरूर mark कर लीजिए जैसे ही आप attendance mark करोगे आपको जो है इस lecture के e-pdf note जो है free of cost मिल जाएंगे तो फटबट से उस attendance link पे click करके अपनी attendance जरूर mark कर लीजिए next देखो यहाँ पर in journal the current asset required to be held by a firm can be classified as a debt तो हमने यहाँ पर factors पर लिया उसके बाद हम generally बात करेंगे कि कोई भी organization के पास किस तरह के यहाँ पर assets होते हैं सबसे पहले देखो यहाँ पर हमारे cash और cash equivalent होते है current assets की बात की जा रही है यहाँ पर fixed assets की बात है क्योंकि जो बतिंग कैपिटर में सिर्फ पोर्शिट करने यह होता ठीक है नार्मली सबके पास cash और बैंक बैलेंस होता है कि एक कैशल में बैंक बैलेंस हमारा अमिनजूरियंग नैक्स यह कि कपनियों को इनवेंटरी जो है मेंटेन करके पर जो stock होता है उनके पास चाहे finish good का हो, चाहे raw material का हो, चाहे work in progress का हो, उन सभी को साथ में हम क्या कहते देते हैं, inventory, तो जो stock पड़ा हुआ है, ठीक है, वो भी company के लिए एक asset ही होता है, next एक हो गया है receivable, मतलब कि जो उसने product वगैरा sale किये हैं, credit भे किये हैं, ठीक है, उससे जो उसको पैसा मिलना है, जो receive होने है, वो भी company के पास assets होते हैं, वो भी एक company की assets होती है, next एक हो गया है other current assets, ठीक है, इसके इलाबा भी हमारे कुछ assets यहाँ पर होते हैं, जैसे कि prepaid expense हो गया, आपने कोई खर्चा जो है, आप भी करना नहीं था, पर आपने कर दिया, ठीक है, आपने advance में कर दे, तो वो भी आपके लिए यहाँ पर क्या बन जाते हैं, assets, तो normally अगर आप किसी भी company की balance sheet में देखोगे, तो यह आपको current assets में दिख जाएंगे, clear आपको, next point हमारा यहाँ पर important point क्या है, sources of finance for current assets, ठीक है, अब हमने देख लिया कि company को यह यह current assets maintain करके रखने पड़ते हैं, अब company किस source है इन assets को maintain करते हैं, कहां से पैसा लियाती है, इन assets को maintain करने के लिए, वो हम यहाँ पर detail में जो है, discuss करेंगे, sources of finance for current assets, जैसे कि मैंने आपको बताया था, शुरू में ही working capital management में current assets के साथ साथ जो sources हैं, जहां से हम current assets को arrange करते हैं, वो उनको भी manage करना ज़रूरी होता है, तो पहला हमारा यहाँ पर देखो क्या है, source, forms, open, working capital, funds, मतलब कि सबसे पहला जो source होता है, current assets का जो source होता है, या फिर working capital का जो source होता है, company खुश्ची पैसा लगाती है, ठीक है, company क्या करते है, जो उसके long term sources होते हैं, ठीक है, उनके बाद जो long term funds होते हैं, उसका कुछ हिस्सा जो है, वो working capital में जो है, लगा देती है, ठीक है, तो जो firm है, उसके पैसे से भी current assets जो है, वो arrange की जाती है, और normally यहाँ पर देखो, normally जो bankers इंडिया के, वो मानते हैं यहाँ पर, कि कम से कम 25% of total current assets, ठीक है, जो इतनी firm की total current assets है, उसका कम से कम 25% जो है, company अपने पैसे से जो है, वो लगाएगी, ठीक है, अपने पैसे से arrange करेगी, clear है, तो इसके उपर भी MCQ बन सकता है, कि कितने percent कम से कम यहाँ पर firm को अपने पैसे लगाने पर दें, current assets को arrange करने की लिए, ठीक है, और इसी capital को हम यहाँ पर net working capital भी कहा देते हैं, ठीक है, जो पैसा यहाँ पर firm अपने पैसे से current assets को arrange करते हैं, जितना पैसा खुद लगाती है working capital पर firm, उसे हम net working capital भी कहते हैं, आगे मैंने इसका मतलब आपको समझा दिया था, next एक है accruals, अब यह accruals क्या होते हैं, पहले यहाँ पर मैं इसको accruals का meaning समझा दू आपको, accruals का मतलब क्या है, कि company पे वो ऐसा कोई expense जो कि accrual हो गया यहाँ पर कि मालो, यहाँ पर क्या है एक, यहाँ पर employer, आपके पास एक employer काम करता है, ठीक है, तो यहाँ पर employer ने आपके पास जो है, one month काम किया, ठीक है, आपके पास जो है, यहाँ पर one month काम किया, ठीक है तो यहाँ पर देखो, one month की जो salary है, वो आपके accrual हो गया, आपको ए परसन को one month की salary pay करनी है क्योंकि इसने one month तक यहाँ पर salary pay करती है, तो इसको हम क्या कहते है, accrual होना, जैसे ही 30 तारीख खतम हुआ, महिला खतम हुआ, आप एक liability arise होगी, कि आपको इसकी payment करनी है, तो यह जो accruals है न, यह भी हमारे source of finance होते हैं, current assets को arrange करने के लिए, अब यह कैसे होते है, जैसे example, यही example था समझाओंगा आपको, त है, क्या होगी, accrual हो गई, clear है, पर इस salary की payment है, हमें कब करनी है, 30 तारीख के बाद, कभी-कभी तो 10 तारीख पर भी companies payment कर दिये, तो company को देखो, जो expense है, वो तो accrual हो गए, यहीं से, पहली तारीख से ही शुरू हो गया, पर इसकी payment करने को कम से कम 30 दिनों तक जो है, wait करन है, next देखो, यहाँ पर क्या है, if the balance sheet of the firm is prepared on a particular day, these accruals will appear as a current liability and these accruals are the short term source of finance for the firm, ठीक है, तो यहाँ पर देखो, जो accruals होंगे, वो तो एक current liability, एक तो show होगे company को, ठीक है, क्योंकि उसको pay करना है, साथ की साथ, ठीक है, वो उसकी asset भी होंगे, ठीक है, उससे उसने, जो प create होगे, arrange होगे, clear है, तो यह भी हमारा, यहाँ पर short term, current asset को arrange करना का, यहाँ पर हमारे लिए finance होता है, next देखो, क्या है, trade credit, यह trade credit क्या होता है, जब भी हम business करते हैं, ठीक है, हम raw material खरीदते हैं, तो कई बार हम credit, जैसे हम credit पर समान बेजते हैं, वैसे हम credit पर समान खरीदत हैं, यहाँ पर raw material खरीदा, ठीक है, तो इस person ने कहा, कि तीन महिनें बाद आप इसकी जो है, payment कर देना, हमने तीन महिनें का, मैं time मिल गया, तो यहाँ पर देखो, दस जार का हमारे पास current assets, arrange हो गया, पर कहा, किसके पैसे से हुआ, यहाँ पर supplier के पैसे से, तो यह जो हमारा supplier, ठीक है, firm को उस से supplier से एक credit जो है, मिलता है, next एक वो क्या है, trade credit is often a substantial source of short term finance of a firm, इससे भी company को short term finance जो है, मिल जाता है, तो यहाँ पर दस जार, आप मान के चल सकते हो, कि stock के रूप में आपने उससे दस जार borrow ही कर लिया, next एक वो क्या है, firm has to be considered to main aspects in availing the trade credit, मैंने आपको � जादा से जादा benefit लगे, तो इसलिए जब एक firm trade credit लेती है, तो उसको दो aspect यहाँ पर consider करने पड़ते है, सबसे पहले, how much credit can be provided by the supplier, जो सामने वाला supplier है, वो कितना credit देने के लिए त्यार है, दूसरा देखो क्या है, how much credit should be availed by the firm, और actually मैं firm ने कितना credit यहाँ पर सामने वाले willing to provide depends on the following factor, तो यहाँ पर जो पहला हमने देखा था कि supplier कितना credit देने के लिए त्यार है, वो कुछ factors पे यहाँ पर हमारा depend करता है, वो factors कौन-कौन से है, सबसे पहले देखो क्या है, industry practice, जो company है, वो किस तरह का यहाँ पर काम कर रही है, उसके उपर depend करता है कि supplier कितना credit देग नॉर्मल person भी देखेगा पहले कि जो पहले इसने credit पे लिया हुआ है, loan वगर लिया हुआ है, क्या उसकी repayment अच्छे से कर पारी है, तब ही न वो मेरे पैसे को वापस कर पाएगी, तो यह भी एक factor होता है, next यह liquidity position of the firm, जो firm है उसकी liquidity कैसे, liquidity का मतलब है कि क्या वो अपने expenses क बारी आएगी, अगर उसकी liquidity position अच्छी नहीं होगी, तो वो पैसा pay ही नहीं कर बाएगा, जिसकी वज़े से creditor को यहाँ पे loss हो जाएगा, तो वो भी एक consider करता है, next यह form's profitability over last few years, form की profitability भी check की जाती है, clear आपको, next एक वो कहा है, the decision of the firm regarding the amount of credit to be availed from the supplier depends mainly on, यह हमने बात करी ह के ऊपर, company जो है, वो discuss करते है कि उसे कितना credit लेना चाहिए, कोई भी company कितना credit लेगी, वो इन दो mainly, दो factors पे depend करता है, एक हमारा क्या होता है cost of credit, दूसरा हमारा क्या होता है liquidity position of that form, तो यहाँ पर देखो, हमारा cost of credit क्या होता है, इसका मतलब समझा दू, cost of credit, जो आपने credit ल करते हो, तो आपको समान क्या पड़ता, सस्ता पड़ता है, जैसे कि मालो 10,000 का समान है, तो जब आप cash payment करते हो न, तो वो आपको यहाँ पर 9,000 पे भी दे देता है, आपको यहाँ पर cash discount भी यहाँ पर मिल जाता है, वैसे ही, अगर आप यहाँ पर credit पे खरीदे हो गई, त credit कितना लेना चाहिए और कितना नहीं लेना चाहिए, दूसरा कहा है liquidity position of the firm, जो liquidity position of the firm की वो कैसी है, अगर liquidity position अच्छी है, उसके बाद sufficient cash flows है, inflows है, अपने expenses को पूरा करने के लिए वो credit लेगी नहीं, लेगी भी तो बहुत कम लेगी, तो liquidity position भी यहाँ पर dependent करता है, clear आपक से भी loan भी ले सकते हैं, clear आपको, तो यहाँ पर देखो, working capital advance provided by the commercial banks may be in the form of fund based and non fund based facilities, अब यह जो हम commercial banks से loan लेते हैं, जो finance लेते हैं, वो दो तरीके के हो सकते हैं, एक हमारे होते है fund based, दूसरे हमारे होते है non fund based, fund based में जिसमें actually में जो bank है वो आपको एक fund प्रवाइड करता है, आपको पैसे दी दी, आपको actually में पैसे मिले, next क्या है non fund based facilities, जिसमें bank actually में आपको पैसे नहीं देता, bank की बज़े से आपको यहाँ पर पैसे मिल जाए, जैसे example यहाँ पर लिखा है, letter of credit, bank guarantee या पर co-acceptance of bill, letter of credit आप लोगों को पता है कि जब आप सामने किसी buyer से, जैसे उस letter of bank की guarantee पे ही हमें जो है, यहाँ पर समान जो है उधार पे based है, तो यह क्या होगे, एक non fund based facilities है, ऐसी bank guarantee भी दे दे किसी केस में, कोई person से हम loan ले दे दे, bank ने guarantee दे दी, तो हमें उसकी बज़े से loan मिल गया, तो bank ने हमें क्या provide की, यहाँ पर non fund based facilities, क्योंकि bank की बज़े से accept कर सकती है, ठीक है, उनको जो finance चाहिए, वो अपने current asset में, जो public deposit से भी arrange कर सकती है, ठीक है, तो जो public deposit होती है, generally क्या होता है, एक piece of paper होता है, document होता है, नागेशेबिल इंस्ट्रूमेंट होता है, ठीक है, उससे वो जो है, deposit accept करती है, public से, और उसके ऊपर एक fixed यहाँ पर interest जो है, पे करते हैं, जिसके बदले में एक deposit का certificate भी issue किया जाता है, हमारे depositor को, clear है, तो इससे भी यहाँ पर जो है, companies, current assets को arrange कर सकते हैं, next एक वो क्या है, inter-corporate deposit, अब यह inter-corporate deposit क्या होता है, सबसे पहले मैं आपको पता दू, inter-corporate मतलब क्या होता है, जब हम जो है, बात करते हैं, एक organization दूसरे से अलग, मतलब कि जैसे यह, मालो, एक business है यहाँ पर, जैसे कि यहाँ पर देखो, inter-corporate deposit का मतलब, एक A company है, एक यहाँ पर B company है, ठीक है, तो यहाँ पर देखो, एक, यह दोनों एक दूसरे से बिलकुल independent है, मतलब कि यह बिलकुल अलग है, इसके उपर दूसरे का बिलकुल भी कन्डोर नहीं है, ठीक है, तो इसने इससे जो है, यहाँ पर deposit accept किया है, B company से, तो इससे हम यहाँ पर क्या कहते है, inter-corporate deposit, तो जब एक company दूसरी company से deposit accept करते है, तो उसे हम यहाँ पर क्या कहते है, inter-corporate deposit, clear है आपको, तो यहाँ पर देखो, short term deposit, up to 6 months accepted by a company from another company, ठीक है, 6 months के लिए यहाँ पर किसी दूसरी company से यहाँ पर deposit accept किया है, तो उसे हम यहाँ पर क्या कहते है, inter-corporate deposit, next देखो क्या है, in inter- एक type ऐसी होती है जिसको हम call deposit भी कहते हैं ठीक है जिसमें जो सामने वाला person है जिसने हमें पैसा दिया है जिसने हमें deposit करवाया है ठीक है वो एक short notice पे हमसे पैसा वापस माँचता है वो short notice क्या है वन लेगा ठीक है तो इसके ऊपर भी answer क्यों बन सकता है कि short call right debenture for working capital ठीक है तो company जो होती है वो generally क्या करते हैं यहाँ पे debentures भी issue कर सकते हैं अपने shareholders वो जो उसके company के owner है company को और funds के requirement होती है तो वो क्या करती है अपने ही shareholders को कुछ debentures issue कर देते हैं जिसे हम rights issue भी कहते हैं ठीक है guided debentures भी कहते हैं तो उससे भी fund यहाँ पर raise कर लेते हैं ताकि वो working capital में उसको include करता है next वो क्या है commercial papers यहाँ पर commercial paper भी यहाँ पर issue कर देते हैं companies जिससे भी वो fund raise कर पाते हैं ठीक है तो commercial paper क्या होता है एक money instrument होता है जिससे हम dealing कर सकते हैं यहाँ पर देखो commercial paper is an unsecured money market instrument money market instrument होता है और generally यह short period के लिए होता है money market instrument ऐसा instrument होता है जो short period के लिए ही होता है उसको हम short period में ही cash में convert कर लेते हैं ठीक है issued in the form of promissory note and CP is privately placed instrument was introduced in 1990 ठीक है 1990 में जो है commercial paper का जो concept है वो introduced किया गया था ठीक है तो companies commercial paper को भी issue करके यहाँ पर fund raise कर सकते हैं जिससे वो अपने working capital के जो finance होते हैं जो expenses होते हैं उनको पूरा कर सकते हैं अब तो कोई भी company यहाँ पर commercial paper issue नहीं कर सकते हैं इसमें कुछ यहाँ पर conditions होते हैं eligibility होती है अगर कोई company इस conditions किसी को पूरा कर पाती है तभी वह कब्श के पर को इशु कर सकती है अदरवाइस कमर्श पिपल को इशू नहीं कर सकती तो यहां पर देखो अने अगर बॉडी कॉर्पर्ट विद इन अ मिनिमम नेट वर्थ टॉपहंडल गुरु इज के अगर एक कंपनी के जो मिनिमम नेट वर्थ है जिसके मिनिमम नेट वर्थ क्या है यह फिर उससे ज्यादा है तो उसके नाम वह सीपी इशू कर सकती है तो कम से कम उसकी नेट वर्थ होनी चाहिए नेक्स्ट कैर एनी अदर एंटिटी स्पेशली परमीटेड जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है वह स्पेशली कह रहा है कि यह एंटिटी यह कंपनी जो है वह सीपी को इशू कर सकती है ठीक है तो उस केस में भी वह इशू कर सकती है नेक्स्ट वर्क और कॉर्परेट सोसाइटी यूनियन अनलिमिटर पार्टनेंशिप विदाम मिनिमम आफ नेट वर्थ ऑफ एंडर क्रोल और हायर वह भी यहां पर जो है इशू कर सकते कहने का मतलब क्या है कि एक कंपनी हो कॉर्परेट सोसाइटी हो यूनियन और कोई भी हो उसके अगर हंड्रेड प्रोसेज ज्यादा व्यायजाइट वह जो है इसी पी को ये कर सकती है आपको लिया है तो फटो एक बिल्ट энергic ग्रा ही यहां तक क्लीयर विलेट बच्चों दूसरी बता जाइए क्या आपको यहां तक क्लीयररचार जी हमारे अपाराइट अब फा है जो companies है वो short term जो current assets है उसको arrange
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