BP VIDEO LECTURES OF ASHISH SIR (FOR ALL SCALES) Derivatives, Futures options ,forwards, swap ,ALM

Derivatives, Futures options ,forwards, swap ,ALM

Derivatives, Futures options ,forwards, swap ,ALM — a Bank Promotions VIDEO LECTURES OF ASHISH SIR (FOR ALL SCALES) video lecture on Learning Sessions.

14 Jun 2026 36:33 min 8 views
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regarding the derivative, derivative, derivative के नाम से ही पता रखता है derive, देखे पहला जो word है, first आप जो है, that is the derive, यानि कि इसकी खुद की अपनी कोई value नहीं है, खुद की अपनी कोई value नहीं है, जो underlying asset होगा, जो underlying financial product होगा, उसके बेस पर इसकी value derive होगी, उसके बेस पर इसकी जो value है, वो derive होगी, यानि कि ख� बनेगी, अब ये underlying जो value हो, कौन से हो सकती है, maybe हो सकता है किसी stocks related हो, maybe हो सकता है किसी stocks related हो, maybe हो सकता है कोई commodity हो, commodity जैसे wheat हो गया, rice हो गया, ये basically commodities ही तो है, कहने का मतलब है, जब इस stock की, जब इस commodity की, जब इस foreign currency की जो value है, वो कम जादा होगी, उसके हिसाब से जो derivative है ना, � तो derivative की क्या जरूर होता है, तो derivative एक नया एक यहाँ पर आपको products provide करती हैं, जिन में आप investment कर सकते हैं, जिन में आप investment कर सकते हैं, तो derivative जो है, इनका इस्तेमाल किसली के लिए किया जाता है, इनका इस्तेमाल दो ही purposes के लिए किया जाता है, एक किया जाता है for the hedging purposes, and second is for the speculation, second position है stock market में जो भी हमारी position है foreign exchange में उसको safeguard करने के लिए derivative का इस्तेमाल करते हैं या फिर speculation purposes के लिए सिर्फ और सिर्फ अंदाजा लगाने के लिए हम इस्तेमाल करते हैं आपने यहां पर अपनी knowledge लगाई उसके हिसाब से आपको लगता है कि जो market है वो आपकी ऊपर को जाएगी वह market जो है आपकी ऊपर को जाएगी ठीक है आपको लगता है market ऊपर को जाएगी तो आप क्या करेंगे low-price पर पर्चेस करेंगे हाई प्राइस पर � Coin issuing अपने बेच देंगे यह ही आपकी speculation जाएगी इसी तरह से आप इसी तरह से आप क्या कर सकते हैं अगर आपको लगता है मार्किट नीचे आएगी तो डेरिवेटिव का इस्तेमाल करते हुए आप यहां पर हायर वैल्यू पर यहां पर पर्चेज कर सकते हैं हायर वैल्यू पर परचेज कर सकते हैं एंड ज्लूर वेल्यू के ऊपर अपसल कर सकते हैं लुटा जानकर कैसे भी कर सकते हैं सब्सक्राइब करेंगे थोड़ी ऑन कि आप हार प्राइस पर भाई लिए व् pendant लोग प्रैस पर शार्च मिली जा पहुंचे ये पॉशिबल possible है अगर आप यहां पर derivatives का इस्तेमाल करते हैं तो यहां पर ये change possible है तो यहां पर आपने आपको safeguard भी कर सकते हैं and साथ की साथ अन्दाज़ा लगाने के लिए भी derivatives का आप इस्तेमाल करते हैं ठीक है तो derivatives अगर हम देखें तो चार तरह की देरिवेटिव रहते हैं एक है आपका फॉरवर्ड कंट्रेक्ट दूसरा है आपका स्वैप थर्ड वन इज द फ्यूचर्स एंड फॉर्थ वन इज ऑप्शंस तो चार डेरिवेटिव आपके पास हैं कौन-कौन से मैं यहां पर स्क्रीन पर फटाबट से लिख दे तो पहला दिवांटर जो है डेढ़ीज आफ यूचर वे ज़केड़ फॉरवर्ड कंट्रेक्ट डाट अफ ओर वर्ड जैसे हम फ्वॉरेक्स के रिलीटिव जो कंट्रैक्ट करते हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट वह गया पहला दिवांटर हो गया ठीक है स्टेक इंड्रा फ्यूचर यूजर लोगे उनके बारे में बात करेंगे थर्ड ऑन इडिस मिटिफॉर्ड इन ऑप्शंस थर्ड ऑन इजाब्शंस एंड फूर्ट वनटिफर्ट इन द इन बाथ यह चार हमारे पास चारवित अधिवरे यह जो दूर डेरीविटिंग forward and swap ये tradable नहीं होते ये stock exchange पर trade इनको नहीं किया जाता जबकि जो future and options हैं इनको यहाँ पर stock exchange के उपर trade किया जाता है तो सबसे पहले इसमें बात करते है regarding the forwards regarding the forward जैसे कि माल लिजिए आपके पास जैसे हमने import bill का example लिया था अब bank के पास import bill है या export bill है तो bank की liability बढ़ रही है bank को risk दिख रहे है कि underlying risk है पता नहीं आने वाले time में जो value की adverse यहाँ पर movement ना हो जाए तो bank को जादा पैसा पे करने पड़ेगा तो bank के case में हमने देखा था कि bank क्या कर रहा है forward contract में आ रहा है forward contract में आ रहा है forward contract से मतलब क्या हमारा कि पहले ही जैसे आज से दो वीने बाद आज से एक मेने बाद तीम मेने बाद कितना यहाँ पर price होने वाला है currency का उसके हिसाब से पहले अपने आपको contract में enter कर लेता है यहाँ तो buy के recording होगा यहाँ फिर selling के recording होगा दोनों के recording यहाँ पर कोई भी contract हो सकता है यानि कि basically यह value जो होगी buy sell की value होगी यह कहां से derive होगी यह basically derivative क्यों है क्योंकि इसकी value जो है वो derive हो रही है कहां से value derive हो रही है जो foreign currency है वहां से derive हो रही है foreign currency से derive हो रही है value और तभी यह forward contract भी के आपका derivative है, ये आपका क्या है derivative है, forward क्या है आपका एक contract है, that is offered over the counter, ये over the counter offer इसका दिया जाता है, यानि कि ये tradable तो है नहीं है, ये over the counter available है, to customers having underlying exchange risk यानि कि जहांबर exchange risk है, उसको safeguard करने के लिए, उसको hedge करने के लिए, उसको limit करने के लिए, जो customer है यहाँ पर forward contract में enter होते हैं, जो forward purchase contract है, यानि कि जो buy का contract है, those are being entered into by the exporters, those are being entered into by the exporters and जो forward sale contract है, those are being entered by the importers, तो ये point यहाँ पर note कर लिजे, जो sale contract है वो यहाँ पर importers के पर enter कर जाता है जो यहाँ पर purchase contract है that is being entered by the exporters ठीक है? further जो कोई भी यहाँ पर जो कोई भी यहाँ पर entities हैं all the entities with underlying exposures are now entitled to forward contracts तो यहाँ पर कोई भी entity जो है वो forward contract में enter हो सकती है forward contracts determine the rate and date on which the delivery of the foreign currency takes place यहाँ कि जिस दिन यहाँ पर जिस दिन यहाँ पर आपके foreign exchange की delivery होगी जिस rate के उपर delivery होगी वो पहले ही determine कर लिया जाता है तो जो points यहाँ पर यहाँ पर आप premium के case में add करते हैं discount के case में subtract करते हैं उन्हें हम क्या कहते हैं those are termed as forward point उन्हें हम कहते हैं forward point ठीक है तो इनके हिसाब से आप जो भी forward contract है उसमें आप enter कर जाते हैं और अपने आपको safeguard करते हैं ठीक है exporters जो होते हैं वो आते हैं purchase contract में and जो importers होते हैं they enter into they enter into sale contracts ओके तो उसके बाद बात आती है regarding the second one it is the futures तो future basically होते क्या है the futures are contracts which have standard amounts and delivery period and are traded on the exchanges regulated by the institutions such as the CAB तो यहाँ पर जो future है ना जैसे आप इस राष्टर से समझ लिजे मालिजे company ABC company ABC एक limited company है public company है and इसके जो shares है एक share का price है rupees 100 एक share का market price है rupees 100 ठीक है तो यहाँ पर अगर आपने 100 shares को purchase करना है यह let us say 500 shares को purchase करना है तो आपको कितनी investment करने पड़ेगी you have to invest 50,000 rupees पचास अजार पर लगाएंगे तो इसके आपको क्या मिलेंगे आपको इसके 500 shares मिलेंगे ठीक है लेकिन futures के दूर क्या रहता है आपको सिरफ और सिरफ इनको purchase करने के लिए margin money पे करनी पड़ती है आपको इनको purchase करने के लिए सिरफ और सिरफ क्या करना है जो भी token money है वही पे करनी है और यहाँ पर future के case में lot size के हिसाब से जो shares होते हैं वो available रहते हैं जो commodity है जो share है वो lot size के हिसाब से यहाँ पर available रहती है likewise lot size का मतलब है मान लिजिए जो lot size है वो है यहाँ पर thousand shares का lot size है thousand shares का तो यह नहीं है कि आपको thousand into hundred करके one lakh rupees पे करने पड़ेंगे तो आप investment कर पाएंगे future के case में आप यहाँ पर जो भी यहाँ पर margin है ना मान लिजिए एक share के पीछे जो margin है वो पांच रपे का दस रपे का margin select किया गया तो दस रपे के हिसाब से आपको दस रपे पे करने है दस रपे के हिसाब से कर हम कहा रहे हैं दस रपे आपको पे करने है और दस रपे के साथ आपकी तो फीचर है जिनके स्टैंडर आइमाउंट होते हैं और इनका फिक्स होता है बिल्डर भी सब्सक्राइब यानि कि उसके बाद इनको करना पड़ेगा यानि कि यह खत्म हो जाएगा इनके ट्रीड होती है ठीक है और इनको ट्रेड किया जाता फर्डर दीजा ट्रेड इट ऑन द एक्सचेंज इस यानि कि अगर आपने एक लॉट पर चेयर कर लिया बन थोड़े शेयर का तो आप trade कर सकते हैं, जो भी market price चल रहा है, उसके हिसाब से आप इसको खरीद बेच सकते हैं. So, ultimately future के case में भी underlying जो आपके पास value है, वो कौन सी है? वो आपके पास share की value है ना. यानि कि जो underlying value है, वो derive किसे हो रही है future की? वो आपकी share की value से derive हो रही है. And उसी के बनते हुए आपका यहाँ पर जो lot size के हिसाब से है वो price बन रहा है. अब यहाँ पर अगर आपने एक size एक lot में आपने पैसा लगा दिया. आपने thousand यहाँ पर shares purchase कर लिए. एक lot के तुरूप दस हजार पर देते हुए. कहीं पर आपको दिने बढ़ते हैं एक लाख रुपया थोप इन्वेस्मेंट करते हैं. लेकिन यहाँ पर आपके पास right नहीं है. आपके पास यहाँ पर right नहीं है. सिर्फ और सिर्फ आप यहाँ पर speculation purposes के लिए अपना पैसा लगा रहे हैं. कि आपको लगता है कि इसका price जो है एक महीने बाद increase हो जाएगा. तो आपने पैसा लगा दिया. And मान लीजिए कि एक महीने के बाद price इसका increase हो भी गया. पहले hundred rupees price था. उसके बाद price हो गया इसका hundred and ten rupees. Hundred and ten rupees हो गया. तो यहाँ पर एक share के पीछे आपको कितना benefit हो रहा है? Ten rupees का benefit हो रहा है. Ten rupees का benefit हो रहा है. तो यहाँ पर कोई भी brokerage या फिर कोई भी charges को हम बीच में count नहीं करें. तो दस रुपे का आपको benefit हुआ. तो आपने एक हजार share का lot purchase गिया है. तो आपको total benefit कितना हुआ? Ten thousand rupees का आपको benefit हो गया. Ten thousand rupees का आपको benefit हो गया. लेकिन अगर वही इसका price कम हो जाता. वही अगर इसका price कम हो जाता. दस रुपे कम हो गया. तो यहाँ पर आपको दस रुपे का loss भी हो सकता था. Similarly अगर मान लीजिए rate जो था दस रुपे कम ना होकर पंदरान रुपे कम हो गया. रेट जो था वो पंदरान रुपे कम हो गया. तो उसकी case में जो आपका loss जितना पैसा आपने लगाया था ना उससे ज्यादा हो सकता था. यहाँ पर आपने पैसा invest किया था दस हजार पे. लेकिन loss जो बन गया वो कितना हो सकता था? पंदरान हजार पे हो सकता था. That is why future and options में पैसा लगाना risky भी है क्योंकि जो share अगर आप share purchase करेंगे तो आपको maximum उतना ही loss हो सकता है जितनी आपने capital invest करी है. लेकिन जब आप futures में पैसा लगाते हैं तो आपको futures के case में बात करें future के case में जो आपको loss है वो आपको ने जितनी capital लगाई थी ना उससे भी ज्यादा आपको यहाँ पर नुकसान हो सकता है ठीक है? So that was regarding it. Further obligation to parties to honor the contract once you enter the contract. यानि कि आप जब एक बार future के contract में enter कर जाते हैं तो आपको उस contract को oblige करना ही पड़ेगा आपके obligation आपका करते हुए रहेगा आप उससे बाहर नहीं आ सकते आपको honor करना ही पड़ेगा उस contract को further they need only margin payments and mark to market on daily basis. So, यहाँ पर सिर्फ और सिर्फ as I told you margin money देनी पड़ती है and these are marked to market basis on daily basis. Okay? Next जो है that is regarding the options. That is regarding the options. So, option भी क्या है? These are contracts that provide the right but not the obligation. So, आपको एक अधिकार देते हैं कि आप खरीद सकते हैं, बेच सकते हैं, लेकिन लेकिन आपके ऊपर कोई obligation नहीं है, लेकिन आपके ऊपर कोई आप कह लीजिए कोई आपके ऊपर ऐसा नहीं है कि आपको करना ही पड़ेगा. आपके पास right है कि आप आप खरीद सकते हैं, बेच सकते हैं, लेकिन आपके ऊपर कोई obligation नहीं है, कि आपको एक financial instrument को खरीदना ही पड़ेगा है, या फिर बेचना ही पड़ेगा, ठीक है, the purchaser of the option pays a premium to the option writer, तो यहाँ पर एक example के तुरू करेंगे, तो आपको सभी points यहाँ पर clear हो जाएंगे, ठीक है, तो जो purchaser है, जो option को purchase करता है, वो यहाँ पर option writer को एक premium pay करता है, एक premium pay करता है, the price agreed to is called the strike price, जिस price पर यह दोनों agree करते हैं, उस price को कहते हैं strike price, तो यहाँ पर एक example के तुरू कर लेते हैं, तो जल्दी से इसे cover हो जाएगा यह, तो पहली चीज़ तो यह है, कि option का example ना आप एक तरह से insurance की तरह लेकर चलिए, तो इससे किस तरह से relate करेंगे, insurance को option के साथ किस तरह से relate करेंगे, वो मैं आपको बता रहा हूँ, तो insurance के case में मान लीजिए आपके पास car है, जिसकी value है 10,00,000 रुपे की, अब इस 10,00,000 की car की insurance के लिए आप कितना पैसा पे करेंगे, हो सकता है आप 20,000, हम यहाँ पर assume कर रहे हैं, कि आपने car की insurance के लिए charges पे किये हैं 20,000, तो यहाँ पर आपकी liability कितनी हुई, आपकी liability तो सिरफ और सिरफ 20,000 की हुई न, आपकी liability तो सिरफ और सिरफ 20,000 की हुई, यानि कि कहने का मतलब है कि कल को अगर car चोरी हो जाती है, car में कोई खराबी पड़ जाती है, car का accident हो जाता है, तो उसके case में उसके case में आपका कितना नुकसान होगा आपका नुकसान तो सिर्फ 20,000 का हुआ हम यहाँ पर assume कर गए चल रहे हैं कि आपको 100% claim मिल रहा है ठीक है तो यहाँ पर आपका क्या नुकसान हुआ आपका तो सिर्फ 100 यहाँ पर 20,000 का नुकसान हुआ ना लेकिन जो क के case में रहती है, आप अपने आपको safeguard कर लेते हैं, अपना risk को choose कर लेते हैं, की मेरा जो नुकसान होगा maximum इतना ही होगा, बाकी जो नुकसान होगी किसका होगा? Option writer का होगा. बाकी जो नुकसान होगी किसका होगा? Option writer होगा. ठीक है? लाइकवाइस यहाँ पर person A है जो एक investor है जो एक investor है जो की यहाँ पर invest करना चाहता है options में जो options में invest करना चाहता है और यहाँ पर है एक option writer यहाँ पर है एक option writer अब option writer के पास यहाँ पर क्या है यहाँ पर investor एक premium pay करेगा इसको जो investor है एक premium pay करेगा किसको option writer को and option writer इसे क्या provide करे होगा ना जो भी limited loss है सिर्फ उतना ही होगा उसके ऊपर का जो loss है सारा मेरा सारा मेरा तुम्हें सिर्फ इतना ही loss होगा ठीक है लेकिन साथ की साथ एक point यह भी समझ लीजिए कि insurance के business के case में benefit ज्यादा किसको रहता है individual को रहता है या फिर insurance company को रहता है नैचुरल सी बात है insurance company को रहता है तभी वो insurance कर रही है इसी तरह से यहाँ पर भी जो ultimate ज्यादा benefit रहता है वो किसको रहता है option writer को ही रहता है ठीक है यानि कि option जो sell कर रहा है उसी को रहता है तो further इसका example continue करेंगे and यहाँ पर example जो हम continue करने वाले हैं that would be using the types of the option option की दो तरह की टाइप होती है वह इट ज़रूर ऑप्शन एंड अनदर वन इज पूट ऑप्शन तो कॉल ऑप्शन का यहां पर एग्जांपल देखेंगे उसके थूं आप यहां पर मैं आपको समझाऊंगा तो उसके सिमिलर ही आप पर आपके पास पूट ऑप्शन रहती है तो कॉल ऑप्शन के केस में बेसिकली आप इस रह से समझ लीजिए कि आपके पास यह मैं क्यों ग्राफ यहां पर ड्रॉप कर देता हूं जल्दी से तो 2-10 90 लुटी तो यहां पर हम छोट करें अपना प्रॉफिट इलोच इनकी यह अपना ज!जो यह प्रॉफिट लौज को शो है जब यह डाउंसाइड लॉस है और आपसाइड़ा का प्रॉफिट है। कर देंगे छोट्ट्डिव. cash cheating, payment for debit change, distribution bond share solidification, debit card loan transfer, Mortgage payment, här其实� स्पिर आ 90 रेपूरी त Yoshi ASK HIP HOP Is contract में enter होजाता है, that is option contract and option में आप particular enter करते हैं in the call option. In the call option. So call option में आपके पास क्या रहता है? Right to purchase रहता है. Call option के case में क्या रहता है? Write to purchase. पर्चेज का right रहता है. लेकिन आपके ऊपर किसी तरह की obligation नहीं है. कि आपको purchase करना ही पड़ेगा ठीक है तो आप एक option writer के साथ आप गए and आपने उससे बात की and आपका जो price set हो ना mutual जो price set हुआ that is strike price जो set हुआ वो आपका set हुआ hundred rupees hundred rupees का strike price set हुआ कि आप hundred rupees में purchase कर लेंगे कि आप hundred rupees में purchase कर लेंगे मैं लेकिन यहाँ पर बता रहा हूँ कि ये आपकी ऊपर किसी भी तरह की obligation नहीं है so ये क्या है आपका strike price है hundred rupees का ठीक है तो यहाँ पर आपने जो price तैकिया था वो था ninety rupees का उस टाइम पर चल रहा था sport rate चल रहा था ninety rupees का and further यहाँ पर क्या हुआ जो price है जो price है वो यहाँ पर increase होता होता कितना हो गया आपका one twenty rupees हो गया या फिर one thirty rupees हो गया ठीक है यह यहाँ पर criteria है हम यहाँ पर बात कर रहे हैं कि आपका जो profit है वो यहाँ पर कितना हो गया one thirty तक पहुंच गया ठीक है एक scenario तो यह हो हो गया यहाँ पर ठीक है तो different scenarios बना लेते हैं उसके तू समझेंगे तो आसानी रहेगी तो पहला scenario यह है कि आपका जो price था एक महीने के बाद का वो पहुंच गया 130 वो पहुंच गया 130 तो अब यहां पर फेवरेबल है आपका तो आपका प्रॉफिट हो जाएगा एंड फर्थ आपने इस ऑप्शन राइटर को ना जैसे आपको बताया प्रेमियम पर करना पड़ता है तो स्ट्राइड प्राइस आपने तरह कर लिए 100 रुपीज एंड साथ में आपने प्रेमियम आपने बेग युधि का चीज कर सकते हैं कि 10 रुपीज का तुम्हें आपने पेड लिए पाना चीज का फ्रॉफिट और पहला ज्योति व्यक्ति चीज पर रखने जो शेयर का प्राइज है वह रह गया दूसरे जो 20 तो उसके केस में क्या है कि पोर्ट रेट कितना आपका 90 का था आपने पर्चेस कितने भी किया आपने 100 में किया ठीक है तो अल्टीमेटली आपका मैक्सिमम लॉस कितना रह सकता है यानि कि आपने 90 का था आपने 10 रपए प्रीमियम पे कर दिया तो आपका मैक्सिमम लॉस कितना रहा आपका मैक्सिमम लॉस तो दस रुपए रहा है ना क्योंकि आप डिवेंटर तो कर गए थे यानि कि 90 वाला जो अपने शेयर था वह अंडर में परचेस कर लिया था लेकिन अब उसका रेट चाहे सैमेंटी हो गया लेकिन आपको जितना यहां पर लॉस होगा मैक्सिमम वह कितने का होगा वह दस का ही होगा वह कितने का होगा मैक्सिमम दस का ही होगा तो कहने का मतलब है यहां पर शेयर का जो प्राइस है वह कितना भी कम हो जाए वह कितना भी कम हो जाए लेकिन आपका जो loss है वह कितना रहता है limited रहता है आपका जो loss रहता है वह limited रहता है that is why यहां पर option के case में आप अपने आपको hedging कर रहे हैं अपने आपको hedge कर रहे हैं ठीक है so that was a example of the call option that was example of the call option ठीक है तो further इसके बाद पढ़ लेते हैं here the option holder has a right to purchase so call option के case में यहां पर आपके पास right रहता है purchase करने का लेकिन कोई obligation नहीं है कि आपने purchase करना ही करना है ठीक है and further the option writer is bound to sell at that price यानि कि जिस price पर आपका आपस में रजामंदी हुई है जैसे strike price जिसम कहते हैं तो उस price के ऊपर जो आपको holder है ना जो यहां पर option writer है उसे बेचना ही पड़ेगा जैसे हमने यहां पर example ही थी ना कि जो price था वो 70 हो गया price जो था 70 हो गया आपने यहां पर 90 वाला जो stock था उसे पर पर्चेस किया था कितने में आपने पर्चेस किया था 100 में ठीक है आपका प्राइस तो यहां पर तया हो गया था 100 का तया हो गया था तो आपने यहां पर पे किया कितना 100 प्रीज पे किया ना एंड साथ में दस रुपए का प्रेमियम गया तो आपका नुकसान कितना हुआ maximum आपका नुकसान तो सिर्फ और सिर्फ दस का ही हुआ है जबकि जो share है वो seventy पर खड़ा है तो यहाँ पर आपका नुकसान क्या हो गया ultimate आपको यहाँ पर seller को बेचना ही पड़ेगा strike price के ऊपर ठीक है अगर ज्यादा price हो जाता है तो आपके ऊपर obligation है कि आपको hundred के ऊपर purchase करना पड़ेगा फिर आप market price पर purchase कर सकते हैं ओके इसी तरह से आपके पास होती है put option so put option क्या है put option here the option holder has a right to sell यहां पर जो option holder होता है इसके पास right to sell होता है लेकिन obligation होती जैसे यहां पर call option के case में right to purchase होता है इसी तरह से put option के case में right to sell होता है ओके इसी तरह से next derivative है that is a swap derivative that is a swap derivative तो swap में basically क्या रहता है आपका simultaneous agreement रहता है there is simultaneous exchange sale and purchase agreement रहता है underlying currency या फिर interest rate के basis पर तो मैं आपको यहां पर currency rate swap के हिसाब से समझा देता हूं currency rate swap के हिसाब से समझा देता हूं likewise यहां पर दो persons है person A है and person B है and इन्होंने दोनों ने ना एक lakh कर पर invest कर रखा है ठीक है यहां फिर एक ऐसा खरीद जी कि जो पैसा इन्होंने investment कर रखी है ना जो इन्होंने investment कर रखी है उसके ऊपर जो interest है जो आपके पास अवधि आर्डिया वह comparable है जो आपको टाइट इन्वेस्टमेंट के ऊपर वह क्या है comparable एंड फर्दर एक जो यहां पर इंट्रस्ट यहां पर मिल रहा है वह फिक्स रेट पर मिल रहा है एक जो इंट्रस्ट मिल रहा है वह फिक्स रेट पर मिल रहा है एंड बी ने जो इन्वेस्टमेंट कर रखी है इसको यहां पर जो इंट्रस्ट swap my한테 jarrod and 거든 करें माते हैं कि आपको ऑठ परसेंट के हिसाब से यहां पर इंटरेस्ट मिल रहा था आप � fixed में ठीक है तो यहाँ पर यहाँ पर जो difference है difference of interest है वो यहाँ पर pay कर दिया जाएगा आपस में ठीक है तो यहाँ पर बी को fixed जाइए था तो इस वाला जो rate applicable था ए वाला जो अब बच्चों को मिला करेगा इस कितने तथा आठा तो उसके पास अलग दिया है तो उसको डिफरेंस सब्सक्राइब करना पड़ेगा बी पर जहां पर रेट तो से यह रेट तो आप पर सेंट का लेकिन जो यहां पर फ्लोटिंग है वो यहाँ पर हो गया है 10% का floating rate हो गया है 10% का तो fixed वाले में B के पास कितनी earning हुई floating के हिसाब से B के पास earning हुई 10,000 की लेकिन A के पास fixed rate के हिसाब से कितनी earning हुई 8,000 की ही earning हुई तो यहाँ पर जो 2000 का difference है वो B को pay करना पड़ेगा A को ठीक है तो यह basically swap रहता है यह basically गया रहता है swap agreement रहता है इसी तरह से currency swaps होते हैं ठीक है इसी तरह से currency swaps होते हैं okay so that was regarding the that was regarding the derivative contracts that was regarding the derivative contracts so उसके बाद बात करते हैं regarding the ALM that is the asset liability management asset liability management so asset liability management क्या है जो भी assets है liabilities है आपको बात करते हैं आप उनको balance sheet में अपने इस तरह से manage करना चाहते हैं, आप अपने balance sheet में जो ALM हैं, उनको इस तरह से manage करना चाहते हैं, ताकि जो interest income है आपकी, आप उसे maximize कर पाएं, and जो liquidity risk है, interest rate risk है, उसको कम कर पाएं, liquidity risk क्या रहता है, what is liquidity risk, तो हमने एक example में इसको पहले cover किया था, likewise यहाँ पर XYZ bank है, तो XYZ bank का अपना पैसा तो है नहीं है, XYZ bank का अपना पैसा तो है नहीं है, तो इसने यहाँ पर यह पैसा ले रखा है, depositor से, depositor से पैसा ले रखा है, ठीक है, further यहाँ पर इसने, बैंक ने आगे क्या कर रखी है, lending कर रखी है, तो lending का repayment schedule बना हुआ है, जिसके साफ से पैसे वापिस आएंगे, in between क्या होता है, in between यहाँ पर एक withdrawal हो जाती है, बड़ी withdrawal हो जाती है deposit में से, उसकी वज़ा से क्या है, liquidity की कमी आ जाती है, यहाँ पर liquidity obligation थी, कि बैंक को pay करना पड़ा, 10 करोड़ पे pay करना पड़ा, लेकिन बैंक के बास इतने funds available नहीं थे, उस condition में क्या होगा, बैंक को बाहर sources से, borrow करना पड़ेगा, बाहर को बाहर से, बाहर से क्या करने पड़ेगी, borrowing करनी पड़ेगी, मान लिजिये पहले बैंक की, जो net interest income थी, वो कितनी थी, 2% के हिसाब से थी, 2% के हिसाब से थी, ठीक है, net interest income का concept जो है, debt sales regarding, debt sales regarding, आप यहाँ पर deposit के उपर pay कर रहे हैं, 7%, लेकिन further loan के उपर charge कर रहे हैं, 9%, तो net interest आपकी income कितनी हुई, 2% की है, यानि कि spread की बात कर रहे हैं, ठीक है, तो आप यहाँ पर 2% के हिसाब से earn कर रहे थे, लेकिन, जब आपको बाहर से यहाँ पर borrowing करनी पड़ी, तो आपको वहाँ पर interest pay करना पड़ रहा है, 8%, आपको यहाँ पर interest pay करना है, 8%, तो ultimately, liquidity की दिक्कत के करण, आपको बाहर से क्या करना पड़ा, आपको बाहर से borrowing करनी पड़ी, जिसके उपर आपको जादा maybe हो सकता है, आपको interest pay करना पड़े, and ultimately, उससे आपका जो net interest income है, वो क्या हो जाएगी, कम हो जाएगी, ठीक है, तो ALM किस चीज के साथ deal करता है, ALM उस चीज के साथ deal करता है, कि आपने अपने assets liabilities को manage करना है, asset का मतलब है loan, liability का मतलब है, जो आपके deposits हैं उनको, ठीक है, तो अपने asset liability को इस तरह से manage करना है, ताकि जो भी आपकी net earning है, interest से आप उसे maximize कर पाएं, और जो भी liquidity risk है, आपका जो भी liquidity risk है, जो भी interest rate risk है, उसको आप minimize कर पाएं, उसको आप minimize कर पाएं, और यह ALM जो है, that is mandatory for banks, since April 1st, 1999, April 1st, 1999 से, जो ALM है, that is mandatory for the banks, ठीक है, तो Reserve Bank of India ने इसके regard में, banks को guidelines issue की है, तो banks को यहाँ पर, फ्लू अपरोच को इस्तमाल करना पड़ता है, इसके regarding जो भी maturity letters रहती है, उनको यहाँ पर बनाना पड़ता है, ताकि जो भी mismatches है, gaps हैं, उनको manage किया जा सके, तो basic concept क्या रहता है यहाँ पर, उसको हम देख लेंगे, यहाँ पर उससे पहले समझ ली, regarding the ALCO, ALCO क्या होती है, this is asset liability committee, this is asset liability committee, तो एक top management committee है, जिसमें जो भी CMD है, AD है, CEO है, वो इसके जो होते है, head होते हैं, यहाँ पर, यहाँ पर, यह जो committee है, यह देखती है, ALM को किस तरह से system में implement किया जा रहा है, ठीक है, तो यहाँ पर हम बात कर रहे थे, regarding कि आपको ladder basis पर आपको क्या करना पड़ता है, maturity ladder बनानी पड़ती है, maturity ladder का मतलब क्या है, आप different buckets बना लेते हैं, आप maturity buckets बना लेते हैं, आप liquidity के हिसाब से, interest rate के हिसाब से, management आप क्या करते हैं, maturity bucket बनाते हैं, इसकी maturity कितनी बच जाएगी, maturity में कितना time रह जाएगा, 6 मिने का समय रह जाएगा न, तो basically residual maturity गया है 6 मिने के विद, उसके हिसाब से इनको different buckets में place किया जाता है, यानि कि bank का जो भी deposit है, उसको यहाँ पर maturity के हिसाब से, volatility के हिसाब से यहाँ पर place किया जाता है different buckets में, likewise, likewise next day जो आपके यहाँ पर हो रहा है, तो यहाँ पर total आपकी जो buckets हैं, 10 buckets हैं, जहाँ पर next day जो यहाँ पर maturity हो रही है, 2 to 7 days, 3 to 14 days हो गए, 8 to 14 days हो गए, it is 8 to 14 days, उसके बाद 15 to 28 days, then it is 29 to 90 days, तो इनको आपको यहाँ रखने की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ एक idea देने के लिए आपको, कि यह आपकी maturity buckets होती हैं, time bucket के हिसाब से आपकी liquidity को manage करने के लिए, जिनके हिसाब से आपको residual maturity को रखना पड़ता है, अब जब आप यहाँ पर, जब आप यहाँ पर अपने maturity को दे रहे तो, आपको एक idea रहेगा कि आपको कितनी liquidity की ज़रूरत पड़ेगी, आपको यहाँ पर idea रहेगा, कि आपको कितनी liquidity की ज़रूरत है, and further आप यहाँ पर mismatch दे सकते हैं, कि आपके पास कितना repayment आने वाला है, and ultimately क्या gap हो सकता है, क्या gap हो सकता है उसके हिसाब से आप अपनी liquidity को manage कर सकते हैं, better way में, ठीक है, so liquidity को manage करना आपकी profitability को बहुत ज़्यादा आपको effect करता है, जो profitability होती है वो भी बहुत ज़्यादा यहाँ पर effect होती है by the liquidity, ठीक है, so that was regarding the liquidity time bucket, ठीक है, तो उसके बाद second है, it is regarding the interest rate sensitivity, interest rate sensitivity, ठीक है, तो यहाँ पर भी interest rate sensitivity के हिसाब से 8 buckets बना जाती हैं, time buckets बना जाती हैं, जो जैसे 28 days तक की, 29 to 90 days, and further, जैसे 91 to 180 है, 181 to 365, and further, जो 5 साल तक की है, and further जो non sensitive, जो इसमें आपका कासावरा रहेगा, वो इसमें आपका place होता है, ठीक है, अब यहाँ पर interest bucket बनाने का कारण क्या है, interest sensitivity को बनाने का कारण क्या है, अब मान लिजिए, आपने एक, आपके पास एक FDR है, 5 साल के लिए FDR है, इतने आपके यहाँ पर, 5 साल के लिए FDR है, जिसके उपर आप 8% per annum के हिसाब से interest pay कर रहे है, 8% per annum के हिसाब से आप interest pay कर रहे है, ठीक है, तो इस FDR deposit के against आपने, यहाँ पर lending करी हुई है, आपने lending करी है, जहाँ पर, जहाँ पर जो interest income आपकी आ रही है, that is 12%, that is 12%, and आपने यहाँ पर, यह जो lending करी है न, यह आपने करी है, let us say, 4 साल के लिए, यह करी है, आपने 4 साल के लिए lending करी है, तो 4 साल के बाद, जब यह आपका, loan जो है immature होगा, loan की repayment आ जाएगी जब 4 साल के बाद, तो आपके पास funds पड़े हैं, आपके पास funds पड़े हैं, अब यह possible तो नहीं है न, यह ज़रूरी तो नहीं है न, कि आपके जो funds हैं, वो यहाँ पर 12% के उपर दुबारा से loan चला जाए, यह possible तो नहीं है, हो भी सकता है, हो भी सकता है कि loan चला जाए, लेकिन ये ज़रूरी तो नहीं है ना कि आपके जो funds हैं वो फिर से 12% के उपर आप landing कर पाएं ठीक है हो सकता है कि आपको further जो आप एक साल के लिए जो landing कर रहे हैं वो आपको 10% के उपर करनी पड़े तो इसके कारण में आपका क्या हुआ जो net interest income थी आपका जो spread था वो क्या हुआ hit हुआ है आपका जो net interest income है आपकी वो hit हुई है ठीक है तो यहाँ पर interest rate sensitivity के हिसाब से आप buckets में data को place करते हैं ताकि आप interest rate management कर पाएं आप interest rate को भी जो sensitivity है उसको भी manage कर पाएं ठीक है तो दो तरह की maturity buckets रहती हैं आपकी एक आपकी रहती है liquidity liquidity के हिसाब से and दूसरी रहती है आपकी interest rate sensitivity के हिसाब से okay further it is regarding the mismatch position further it is regarding the mismatch position यानि कि अगर आपके asset liability में mismatch रहता है maturity में mismatch हो जाता है जैसे हमने पढ़ा कि आपकी मालिजिये maturity के हिसाब से दो साल के परिड में वो हो रही है दस करोड की ठीक है लेकिन आपके पास जो funds available हैं वो है तीन करोड के तो आपका क्या हो गया ये asset liability mismatch हो गया यहाँ पर asset liability mismatch हो गया तो इस position को यहाँ क्या कहते है this is called mismatch position mismatch position तो mismatch position में आपके पास surplus भी हो सकता है डेफिशिट भी हो सकता है इस case में हमारे पास deficit है surplus condition क्या हो सकती है कि आपके पास जो funds available हैं वो है यहाँ पर आपके पास तेरा करोड तेरा करोड और यहाँ पर आपको funds चाहिए वो चाहिए दस करोड के तो आपकी surplus condition होगी दोनों ही conditions में नुकसान है जो कि आपको कैट़ा ना पड़ेगा अगली करनी पड़ेगी आपको बाहर से बढ़ने में पट्ट नरीकिक और कंडीस्ट में क्या है आप तो आपका सब्सक्राइब वह दोनों ही चीज़ों को मैनेज करना जो है बहुत ही ज्यादा जरूरी है और किसके तरह में आता है ऑति मैनेजमेंट के दायरे में आता है ठीक कि इस रिगार्डिंग मिसमैचेस प्रशुआद बनाए गाइड एंस वियो हां पर जो पहली चार बकेट लिक्कुडिटी को लेकर है पहली चार buckets कौन-कौन सी थी, that was next day 2 to 7 days, 8 to 14 days and 15 to 28 days. So liquidity buckets को लेकर जो पहली चार buckets हैं, वहाँ पर mismatches जो हैं, वो 5, 10, 15, 20% यानि कि respectively ये percentage से जादा वहाँ पर नहीं होना चाहिए, जो mismatch है इस percentage से जादा नहीं होना चाहिए, ठीक है? Then it is interest sensitivity, तो interest sensitivity के regarding जो भी prudential limits हैं, जो भी individual gaps हैं, वो यहाँ पर board या फिर जो management committee है, उसके approval के हिसाब से यहाँ पर limits तय की जाएंगे, उसके approval के हिसाब से यहाँ पर जो limits हैं, वो तय की जाएंगे. Then it is regarding the net interest income, तो net interest income किसके करोती है? कि net interest income is equal to ज

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M
Manoj Mukherjee 3 weeks ago

Watching this right before my Bank Promotions exam, thank you so much!