Ind AS 113 फेयर वैल्यू मेजरमेंट — CAIIB ABFM गाइड (2026)
Ind AS 113 फेयर वैल्यू मेजरमेंट उन स्टैंडर्ड्स में से एक है जिसे CAIIB कैंडिडेट्स अक्सर हल्के में ले लेते हैं — जब तक यह किसी केस-स्टडी क्वेश्चन में इन्वेस्टमेंट वैल्यूएशन या लोन कोलैटरल से जुड़कर सामने नहीं आता। यह खुद कोई नई फेयर वैल्यू रिक्वायरमेंट नहीं बनाता — यह तय करना दूसरे स्टैंडर्ड्स का काम है कि फेयर वैल्यू कब लगानी है — लेकिन यही एक रूलबुक है जो बताती है कि एक बार बताए जाने पर फेयर वैल्यू कैसे मेजर करें और कैसे डिस्क्लोज करें। एक बैंकर के लिए यही वह कड़ी है जो अकाउंटिंग थ्योरी को आपकी ट्रेजरी और क्रेडिट टीमों की हर तिमाही रिपोर्ट होने वाली असली संख्याओं से जोड़ती है।
📊 Ind AS 113 के तहत फेयर वैल्यू का असली मतलब
Ind AS 113 फेयर वैल्यू को एक एग्जिट प्राइस के रूप में परिभाषित करता है: वह कीमत जो किसी एसेट को बेचने पर मिलेगी, या किसी लायबिलिटी को ट्रांसफर करने पर चुकानी होगी, मेजरमेंट डेट पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच एक ऑर्डरली ट्रांजैक्शन में। यहां तीन शब्द सबसे महत्वपूर्ण हैं। "ऑर्डरली" का मतलब है फायर सेल और डिस्ट्रेस डील्स को बाहर रखना — एक फोर्स्ड लिक्विडेशन प्राइस फेयर वैल्यू नहीं है। "मार्केट पार्टिसिपेंट्स" का मतलब है कि एसेट की कीमत उस तरह लगाई जाए जैसे एक जानकार, इच्छुक खरीदार और विक्रेता लगाएंगे, न कि जैसे आपका अपना बैंक उसे देखता है। और "एग्जिट प्राइस" एंट्री या ट्रांजैक्शन प्राइस से अलग है, यही वजह है कि पिछले साल किसी बॉन्ड के लिए चुकाई गई कीमत आज की उसकी फेयर वैल्यू से काफी अलग हो सकती है।
स्टैंडर्ड यह भी कहता है कि एसेट के लिए प्रिंसिपल मार्केट पहचाना जाए — वह मार्केट जिसमें सबसे ज्यादा वॉल्यूम और एक्टिविटी हो — या अगर ऐसा कोई मार्केट न हो, तो मोस्ट एडवांटेजियस मार्केट, यानी वह जो मिलने वाली रकम को अधिकतम करे। किसी बैंक के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के लिए इसका आमतौर पर मतलब है एक्टिव गवर्नमेंट सिक्योरिटीज या कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट, और जिस रेफरेंस का इस्तेमाल RBI अपने रेगुलेटरी गाइडेंस के तहत प्राइसिंग बेंचमार्क्स के लिए करता है, वह प्रैक्टिस में अक्सर इसी प्रिंसिपल-मार्केट जजमेंट को एंकर करता है।

💡 एग्जाम टिप: अगर कोई क्वेश्चन डिस्ट्रेस सेल या फोर्स्ड लिक्विडेशन का जिक्र करे, तो वह कीमत Ind AS 113 के तहत फेयर वैल्यू से साफ तौर पर बाहर है — उसे तुरंत गलत ऑप्शन के रूप में फ्लैग करें।
🏛️ फेयर वैल्यू की तीन-स्तरीय हायरार्की
Ind AS 113 फेयर वैल्यू मेजर करने में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स को तीन लेवल में रैंक करता है, और यह हायरार्की स्टैंडर्ड का सबसे ज्यादा टेस्ट होने वाला हिस्सा है। लेवल 1 इनपुट्स एक्टिव मार्केट में आइडेंटिकल एसेट्स या लायबिलिटीज के लिए अनएडजस्टेड कोटेड प्राइसेज होते हैं — जैसे रोज ट्रेड होने वाला एक लिस्टेड गवर्नमेंट बॉन्ड। लेवल 2 इनपुट्स ऑब्जर्वेबल तो होते हैं, लेकिन खुद कोटेड प्राइस नहीं होते: सिमिलर इंस्ट्रूमेंट्स की कीमतें, इंटरेस्ट रेट कर्व्स, क्रेडिट स्प्रेड्स, या ऐसे मार्केट्स के कोट्स जो पूरी तरह एक्टिव नहीं हैं। लेवल 3 इनपुट्स अनऑब्जर्वेबल होते हैं — इंटरनल मॉडल्स, कैश फ्लो प्रोजेक्शंस, और मैनेजमेंट एजम्पशंस, जिनका इस्तेमाल तब होता है जब कोई मार्केट डेटा सिरे से मौजूद ही न हो, जैसे किसी छोटी कंपनी में एक अनलिस्टेड इक्विटी स्टेक।
यह हायरार्की इसलिए बनाई गई है ताकि ऑब्जर्वेबल डेटा का अधिकतम इस्तेमाल हो और इंटरनल जजमेंट का न्यूनतम। कोई बैंक बस वह लेवल नहीं चुन सकता जो ज्यादा फेवरेबल नंबर दे; क्लासिफिकेशन उन इनपुट्स की प्रकृति से तय होता है जो असल में इस्तेमाल हुए हैं, और हर रिपोर्टिंग डेट पर इसे दोबारा एसेस करना जरूरी है क्योंकि मार्केट कंडीशंस बदलने पर कोई एसेट एक लेवल से दूसरे लेवल में शिफ्ट हो सकता है।
| हायरार्की लेवल | इनपुट टाइप | बैंक में सामान्य उदाहरण | सीधे ऑब्जर्वेबल? |
|---|---|---|---|
| Level 1 | कोटेड प्राइसेज, एक्टिव मार्केट, आइडेंटिकल एसेट | लिस्टेड G-Secs, लिस्टेड शेयर्स | ✅ |
| Level 2 | कोटेड प्राइसेज के अलावा ऑब्जर्वेबल इनपुट्स | यील्ड कर्व से प्राइस होने वाले कॉरपोरेट बॉन्ड्स | ✅ |
| Level 3 | अनऑब्जर्वेबल, मॉडल-आधारित इनपुट्स | अनलिस्टेड इक्विटी, डिस्ट्रेस्ड लोन कोलैटरल | ❌ |
| Level 1→2 शिफ्ट | मार्केट इल्लिक्विड हो जाता है | बॉन्ड ट्रेडिंग रुक जाती है, कोट्स स्टेल हो जाते हैं | ❌ |

⚠️ आम गलती: स्टूडेंट्स मान लेते हैं कि लेवल 2 का मतलब है "लगभग ऑब्जर्वेबल" और लेवल 3 का मतलब है "पूरी तरह अज्ञात।" असल में एक लेवल 2 इनपुट को एसेट की पूरी अवधि के लिए, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, ऑब्जर्वेबल बना रहना चाहिए — एक स्टेल डेटा पॉइंट अपने आप उसे लेवल 3 में डिमोट नहीं कर देता।
🧮 वैल्यूएशन तकनीकें और हाइएस्ट-एंड-बेस्ट-यूज़ रूल
Ind AS 113 तीन व्यापक वैल्यूएशन अप्रोच की अनुमति देता है। मार्केट अप्रोच आइडेंटिकल या कंपेरेबल एसेट्स के असली ट्रांजैक्शंस से मिली कीमतों का इस्तेमाल करता है। इनकम अप्रोच फ्यूचर कैश फ्लोज़ या अर्निंग्स को एक सिंगल डिस्काउंटेड प्रेजेंट वैल्यू में बदलता है — यह तरीका अनलिस्टेड लोन्स, स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स और लेवल 3 इन्वेस्टमेंट्स के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। कॉस्ट अप्रोच किसी एसेट की सर्विस कैपेसिटी को अभी रिप्लेस करने के लिए जरूरी रकम मेजर करता है, जिसे ऑब्सोलेसेंस के लिए एडजस्ट किया जाता है।
नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स के लिए, स्टैंडर्ड एक अलग नियम जोड़ता है: फेयर वैल्यू को एसेट के हाइएस्ट एंड बेस्ट यूज़ को रिफ्लेक्ट करना चाहिए, मार्केट पार्टिसिपेंट के नजरिए से, भले ही बैंक खुद उस एसेट का उस तरह इस्तेमाल करने का इरादा न रखता हो। सिक्योरिटी के रूप में रखी गई कोई रीपजेस्ड कमर्शियल प्रॉपर्टी उसके सबसे वैल्युएबल परमिटेड यूज़ पर वैल्यू की जाती है, जरूरी नहीं कि उस यूज़ पर जो बैंक की योजना में हो। यह उन क्रेडिट टीमों से सीधे जुड़ा है जो रिकवर्ड कोलैटरल को वैल्यू करती हैं, जिसमें वे केस भी शामिल हैं जो Transfer of Property Act के तहत मॉर्गेज के प्रकार से गवर्न होते हैं और यह तय करते हैं कि अंडरलाइंग सिक्योरिटी इंटरेस्ट असल में कितना एनफोर्सेबल है।
जो भी तकनीक चुनी जाए, उसे पीरियड-दर-पीरियड कंसिस्टेंटली अप्लाई करना जरूरी है, और कोई बदलाव तभी जस्टिफाई होगा जब वह उन परिस्थितियों में फेयर वैल्यू का बराबर या ज्यादा प्रतिनिधि मेजरमेंट दे।
📋 गवर्नेंस, डिस्क्लोजर्स और बैंक रिपोर्टिंग प्रैक्टिसेज
चूंकि लेवल 3 मेजरमेंट्स इंटरनल एजम्पशंस पर निर्भर करते हैं, Ind AS 113 डिस्क्लोजर पर काफी जोर देता है। एंटिटीज को हर फेयर-वैल्यूड आइटम के लिए हायरार्की में उसका लेवल, इस्तेमाल की गई वैल्यूएशन तकनीक और इनपुट्स, और — लेवल 3 आइटम्स के लिए — ओपनिंग से क्लोजिंग बैलेंस का रिकंसिलिएशन प्लस एक सेंसिटिविटी एनालिसिस डिस्क्लोज करना होता है, जो यह दिखाए कि अनऑब्जर्वेबल इनपुट्स के रीजनेबल मूवमेंट पर फेयर वैल्यू कैसे बदलेगी। ऑडिटर्स और रेगुलेटर्स इन डिस्क्लोजर्स का इस्तेमाल खासतौर पर यह टेस्ट करने के लिए करते हैं कि कहीं मैनेजमेंट जजमेंट का इस्तेमाल रिपोर्टेड प्रॉफिट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए तो नहीं किया गया।
इसे सही तरीके से करना जितना अकाउंटिंग का सवाल है, उतना ही मैनेजमेंट डिसिप्लिन का भी है। कोई वैल्यूएशन पॉलिसी तभी विश्वसनीय है जब वह एक ठीक-ठाक प्लानिंग प्रोसेस के अंदर बैठी हो — अप्रूव्ड एजम्पशंस, अप्रूव्ड मॉडल्स, एक रिव्यू कैलेंडर — और एक कारगर कंट्रोलिंग फ्रेमवर्क के अंदर हो जो किसी एनालिस्ट को चुपचाप डिस्काउंट रेट बदलकर नंबर मूव करते पकड़ ले। जो बैंक फेयर वैल्यू गवर्नेंस को सिर्फ फाइनेंस टीम का काम मानते हैं, बिना उसे बड़े मैनेजमेंट कंट्रोल से जोड़े, वे अक्सर ठीक उन्हीं ऑडिट टेस्ट्स में फेल होते हैं जिनके लिए Ind AS 113 डिस्क्लोजर्स बनाए गए हैं।

📌 याद रखें: लेवल 3 सेंसिटिविटी डिस्क्लोजर्स कोई एक्स्ट्रा डिटेल नहीं हैं — यही वह मैकेनिज्म है जिस पर रेगुलेटर्स भरोसा करते हैं ताकि रिपोर्टेड कैपिटल फुलाने से पहले अग्रेसिव फेयर वैल्यू एजम्पशंस पकड़ी जा सकें।
🎯 CAIIB ABFM कैंडिडेट्स के लिए यह स्टैंडर्ड क्यों मायने रखता है
ABFM के क्वेश्चंस शायद ही कभी अकेले फेयर वैल्यू की डेफिनिशन रटवाते हैं। वे इसे आसपास के टॉपिक्स के साथ जोड़ते हैं — जैसे कोई फेयर-वैल्यूड इनपुट Altman Z-Score मॉडल जैसी डिस्ट्रेस स्क्रीनिंग के लिए बने डिस्काउंटेड कैश फ्लो में कैसे फीड होता है, फेयर वैल्यू Ind AS 115 रेवेन्यू रिकग्निशन के तहत रिकग्नाइज्ड रेवेन्यू से वेरिएबल कंसिडरेशन वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में कैसे इंटरैक्ट करता है, या लेवल 3 एसेट के लिए चुना गया डिस्काउंट रेट CAPM और पोर्टफोलियो रिस्क-रिटर्न के तहत टेस्ट होने वाले कॉन्सेप्ट्स से कैसे जुड़ता है। Ind AS 113 को स्टैंडअलोन टॉपिक की बजाय कनेक्टिव टिशू की तरह ट्रीट करें, तो केस स्टडीज बिखरी हुई नहीं लगेंगी।
यह सिलेबस का एक ज्यादा स्कोरिंग-फ्रेंडली हिस्सा भी है, ठीक इसलिए क्योंकि हायरार्की एक क्लोज्ड, याद रखने लायक स्ट्रक्चर है — तीन लेवल, हर एक के लिए साफ टेस्ट, और गिनी-चुनी डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स। अपना रिविजन टाइम बाउंड्री केसेज़ पर खर्च करें: कब कोई लेवल 2 इनपुट लेवल 3 में स्लिप करता है, और कब वैल्यूएशन तकनीक में बदलाव सचमुच जस्टिफाइड है बनाम कब उसका इस्तेमाल अर्निंग्स मैनेज करने के लिए किया जा रहा है। मैनेजमेंट और फाइनेंस के जुड़े बाकी चैप्टर्स के लिए, अगली मॉक टेस्ट से पहले CAIIB ABFM टैग हब ब्राउज़ करें।
🧠 Practice MCQs: Ind AS 113 फेयर वैल्यू मेजरमेंट
Q1. Ind AS 113 के तहत, फेयर वैल्यू को सबसे अच्छे तरीके से किस रूप में बताया गया है? (a) किसी एसेट की हिस्टोरिकल कॉस्ट (b) किसी एसेट को खरीदने के लिए चुकाई गई एंट्री प्राइस (c) मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच एक ऑर्डरली ट्रांजैक्शन में एग्जिट प्राइस (d) बैलेंस शीट में दिखाई गई बुक वैल्यू
Answer: (c) — Ind AS 113 फेयर वैल्यू को सख्ती से एक एग्जिट प्राइस के रूप में परिभाषित करता है जो किसी एसेट को बेचने पर मिलती है या किसी लायबिलिटी को ट्रांसफर करने पर चुकानी होती है।
Q2. किसी आइडेंटिकल एसेट के लिए एक्टिव मार्केट में कोटेड प्राइस फेयर वैल्यू हायरार्की के किस लेवल में आता है? (a) लेवल 1 (b) लेवल 2 (c) लेवल 3 (d) यह हायरार्की से बाहर है
Answer: (a) — एक्टिव मार्केट्स में आइडेंटिकल आइटम्स के लिए अनएडजस्टेड कोटेड प्राइसेज लेवल 1 इनपुट का सबसे स्पष्ट रूप हैं।
Q3. कौन सी वैल्यूएशन अप्रोच एक्सपेक्टेड फ्यूचर कैश फ्लोज़ को एक सिंगल प्रेजेंट वैल्यू में बदलती है? (a) मार्केट अप्रोच (b) कॉस्ट अप्रोच (c) इनकम अप्रोच (d) रिप्लेसमेंट अप्रोच
Answer: (c) — इनकम अप्रोच प्रोजेक्टेड कैश फ्लोज़ या अर्निंग्स को डिस्काउंट करके फेयर वैल्यू तक पहुंचता है, जो आमतौर पर लेवल 3 एसेट्स के लिए इस्तेमाल होता है।
Q4. किसी नॉन-फाइनेंशियल एसेट के लिए, Ind AS 113 फेयर वैल्यू को किस बात को रिफ्लेक्ट करने की मांग करता है? (a) केवल बैंक का अपना इंटेंडेड यूज़ (b) ओरिजिनल परचेज़ प्राइस (c) मार्केट पार्टिसिपेंट के नजरिए से हाइएस्ट एंड बेस्ट यूज़ (d) सबसे कम संभावित रीसेल वैल्यू
Answer: (c) — फेयर वैल्यू में हाइएस्ट एंड बेस्ट यूज़ को शामिल करना जरूरी है जो एक मार्केट पार्टिसिपेंट अपनाएगा, भले ही यह होल्डर के असली इंटेंडेड यूज़ से अलग हो।
Q5. Ind AS 113 के तहत लेवल 3 फेयर वैल्यू डिस्क्लोजर्स में क्या शामिल होना चाहिए? (a) केवल क्लोजिंग बैलेंस (b) अनऑब्जर्वेबल इनपुट्स के लिए एक सेंसिटिविटी एनालिसिस (c) ऑडिटर की पर्सनल राय (d) लेवल 3 के लिए कोई डिस्क्लोजर जरूरी नहीं है
Answer: (b) — चूंकि लेवल 3 अनऑब्जर्वेबल इनपुट्स पर निर्भर करता है, स्टैंडर्ड एक सेंसिटिविटी एनालिसिस की मांग करता है जो दिखाए कि उन एजम्पशंस में रीजनेबल बदलाव से फेयर वैल्यू कैसे बदलेगी।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या Ind AS 113 यह तय करता है कि किन आइटम्स को फेयर वैल्यू पर दिखाना है?
नहीं। Ind AS 113 सिर्फ यह बताता है कि फेयर वैल्यू को कैसे मेजर और डिस्क्लोज करना है, एक बार जब कोई दूसरा स्टैंडर्ड, जैसे Ind AS 109, इसकी मांग या अनुमति देता है।
लेवल 2 और लेवल 3 इनपुट्स में क्या फर्क है?
लेवल 2 इनपुट्स ऑब्जर्वेबल होते हैं, चाहे डायरेक्ट हों या इनडायरेक्ट, भले ही वे सीधा कोटेड प्राइस न हों; लेवल 3 इनपुट्स अनऑब्जर्वेबल होते हैं और एंटिटी के अपने एजम्पशंस और मॉडल्स पर निर्भर करते हैं।
क्या कोई बैंक अपनी पसंद की कोई भी वैल्यूएशन तकनीक चुन सकता है?
नहीं। तकनीक को ऑब्जर्वेबल इनपुट्स का अधिकतम इस्तेमाल करना चाहिए, कंसिस्टेंटली अप्लाई होना चाहिए, और किसी भी बदलाव को यह साबित करके जस्टिफाई करना होगा कि वह बराबर या ज्यादा प्रतिनिधि मेजरमेंट देता है।
रेगुलेटर्स लेवल 3 सेंसिटिविटी डिस्क्लोजर्स पर इतना फोकस क्यों करते हैं?
क्योंकि लेवल 3 वैल्यूज इंटरनल जजमेंट पर निर्भर करती हैं, सेंसिटिविटी डिस्क्लोजर्स रेगुलेटर्स और ऑडिटर्स को यह देखने देते हैं कि अगर मुख्य एजम्पशंस बदलें तो फेयर वैल्यू एस्टिमेट कितना शिफ्ट हो सकता है, जिससे अग्रेसिव वैल्यूएशंस सामने आ जाती हैं।
Ind AS 113 फेयर वैल्यू मेजरमेंट उन कैंडिडेट्स को इनाम देता है जो सिर्फ डेफिनिशन रटने की बजाय हायरार्की और उसके बाउंड्री केसेज़ में महारत हासिल करते हैं। एग्जाम से पहले iibf.store/tests पर स्ट्रक्चर्ड प्रैक्टिस के साथ यह फ्लुएंसी बनाएं।
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