Customer Due Diligence Norms: CAIIB BRBL के लिए KYC नियम
Customer due diligence norms यानी ग्राहक सम्यक तत्परता मानदंड वे पहचान, सत्यापन और सतत निगरानी के चरण हैं जिन्हें बैंक को हर ग्राहक संबंध शुरू करने से पहले और उसके चलते रहने के दौरान पूरा करना होता है। भारत में ये Prevention of Money Laundering Act, 2002, PML (Maintenance of Records) Rules, 2005 और RBI के Master Direction on Know Your Customer (KYC), 2016 (यथासंशोधित) से निकलते हैं। CAIIB Banking Regulations and Business Laws के लिए यह सबसे अधिक अंक देने वाले अध्यायों में से एक है: प्रश्न नियम-आधारित होते हैं, आंकड़े तय हैं, और यदि आप सुनी-सुनाई बातों के बजाय ढाँचा याद कर लें तो अंक आसान हैं।
🔍 Customer Due Diligence के पाँच तत्व
RBI Master Direction इस दायित्व को पाँच अलग-अलग तत्वों में बाँटता है, और परीक्षक यह पूछना बहुत पसंद करते हैं कि दी गई सूची में से कौन-सा तत्व छूटा हुआ है।
- निर्धारित पहचान और पते के प्रमाण के आधार पर ग्राहक की पहचान (Identification)।
- किसी विश्वसनीय, स्वतंत्र स्रोत से उस पहचान का सत्यापन (Verification)।
- जहाँ ग्राहक कोई प्राकृतिक व्यक्ति नहीं है, वहाँ beneficial owner की पहचान।
- व्यावसायिक संबंध के उद्देश्य और अभीष्ट स्वरूप को समझना।
- Ongoing due diligence — लेन-देन की निगरानी करना ताकि यह पुष्टि हो सके कि वे घोषित प्रोफ़ाइल और source of funds से मेल खाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से सबसे अहम बात यह है कि due diligence कोई एक बार का खाता-खोलने वाला कर्मकांड नहीं है। पहले चार तत्व शुरुआत में ही पूरे कर लिए जाते हैं; पाँचवाँ तत्व पूरे संबंध की अवधि तक चलता रहता है। जिस बैंक ने 2019 में खाता बिल्कुल सही ढंग से खोला और फिर कभी उसकी ओर देखा ही नहीं, उसने भी इन मानदंडों का उल्लंघन किया है।
दूसरी बात जो अभ्यर्थी चूक जाते हैं: due diligence केवल खाता खोलते समय ही अनिवार्य नहीं है, बल्कि निर्धारित सीमा से ऊपर के किसी occasional transaction पर, जब भी पहले प्राप्त आँकड़ों की सत्यता पर संदेह हो, और जब भी बैंक को money laundering या terrorist financing का संदेह हो — किसी भी सीमा या छूट से परे — तब भी अनिवार्य है।
यदि बैंक यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता, तो निर्धारित प्रतिक्रिया यह है कि खाता खोलने से इनकार किया जाए, मौजूदा खाता बंद किया जाए, और suspicious transaction report दाखिल करने पर विचार किया जाए। खाता अस्थायी रूप से खोलकर कागज़ बाद में इकट्ठा करना कभी स्वीकार्य नहीं है। लागू प्रश्नों में उतरने से पहले अपनी नींव बैंकों के विनियमन का विधिक ढाँचा अध्याय से मज़बूत करें।
💡 परीक्षा टिप: यदि किसी विकल्प में लिखा हो कि खाता खुल जाने और दस्तावेज़ जमा हो जाने के बाद due diligence पूरा हो जाता है, तो वह गलत है। Ongoing due diligence एक स्थायी, निरंतर चलने वाला दायित्व है।
🪪 Officially Valid Documents और डिजिटल रास्ते
PML Rules Officially Valid Documents (OVDs) की एक बंद सूची देते हैं: passport, driving licence, Aadhaar संख्या के कब्ज़े का प्रमाण, Election Commission द्वारा जारी Voter's Identity Card, राज्य सरकार के अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित NREGA का job card, और National Population Register द्वारा जारी वह पत्र जिसमें नाम और पता अंकित हो।
ध्यान दें कि उस सूची में क्या नहीं है। PAN card OVD नहीं है — वह कर-प्रयोजनों के लिए अलग से आवश्यक होता है, और यही एक तथ्य इस अध्याय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला जाल है। जहाँ किसी OVD पर अद्यतन पता न हो, वहाँ ग्राहक कोई deemed-OVD जैसे हाल का utility bill जमा कर सकता है, और फिर तीन महीने के भीतर वर्तमान पते वाला OVD प्रस्तुत करना होता है।
सत्यापन कई रास्तों से पूरा किया जा सकता है, और हर रास्ते की अपनी शर्तें हैं:
- Physical OVD — प्रमाणित प्रति के साथ, तथा मूल दस्तावेज़ किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा देखा गया हो।
- Aadhaar e-KYC authentication, जो PMLA की Section 11A के अंतर्गत अधिसूचित बैंकों के लिए उपलब्ध है, ग्राहक की स्पष्ट सहमति के साथ।
- Offline Aadhaar verification — XML फ़ाइल या सुरक्षित QR code के माध्यम से, जिसमें Aadhaar संख्या स्वयं redact रहती है।
- Digital KYC, जैसा PML Rules में परिभाषित है, जिसमें बैंक के एप्लिकेशन में geo-tagging के साथ live photograph लिया जाता है।
- V-CIP — video-based customer identification process, RBI द्वारा अनुमत एक वैकल्पिक face-to-face चैनल, जिसमें प्रशिक्षित अधिकारी द्वारा संचालित live, अखंडित और सुरक्षित video interaction आवश्यक है।
V-CIP को face-to-face onboarding माना जाता है, और ठीक इसीलिए उस पर वह अतिरिक्त जाँच स्वतः लागू नहीं होती जो अन्य non-face-to-face चैनलों पर लगती है। परीक्षा से पहले वर्तमान पाठ के लिए RBI का Master Directions पृष्ठ पढ़ें, क्योंकि यह Direction बार-बार संशोधित होता रहता है।

📊 जोखिम श्रेणीकरण और Periodic KYC Updation
हर ग्राहक को पहचान, सामाजिक एवं वित्तीय स्थिति, व्यवसाय की प्रकृति और अपेक्षित लेन-देन पैटर्न के आधार पर एक risk category — low, medium या high — दी जानी चाहिए। यह श्रेणी दिखावटी नहीं है: यही तय करती है कि बैंक को कितनी बार KYC ताज़ा करनी है और जाँच कितनी गहरी होगी। risk profile स्वयं गोपनीय है और ग्राहक को कभी नहीं बताई जानी चाहिए।
| जोखिम श्रेणी | सामान्य ग्राहक | Periodic KYC updation | Enhanced due diligence? |
|---|---|---|---|
| Low risk | सत्यापित आय वाले वेतनभोगी व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी, small-account धारक, स्थिर और ज्ञात प्रोफ़ाइल वाली संस्थाएँ | हर 10 years में एक बार | ❌ |
| Medium risk | स्वरोज़गार वाले ग्राहक, व्यापारी, तथा नियमित एवं स्पष्ट गतिविधि वाली अधिकांश फ़र्में और कंपनियाँ | हर 8 years में एक बार | केवल प्रतिकूल संकेत मिलने पर |
| High risk | Politically exposed persons और उनके परिवार, गैर-लाभकारी संगठन, अपारदर्शी संरचना वाले trusts, नकदी-प्रधान व्यवसाय, non-face-to-face ग्राहक | हर 2 years में एक बार | ✅ |
यहाँ दो स्पष्टीकरण अंक तय करते हैं। पहला, जब KYC सूचना में कोई परिवर्तन न हो तो periodic updation के लिए नए दस्तावेज़ आवश्यक नहीं होते — ग्राहक के पंजीकृत ईमेल, मोबाइल नंबर, ATM, डिजिटल चैनल या पत्र के माध्यम से दी गई self-declaration पर्याप्त है। दूसरा, घड़ी अंतिम KYC updation की तारीख से चलती है, खाता खुलने की तारीख से नहीं।
जहाँ केवल पता बदला है, वहाँ ग्राहक नए पते की self-declaration दे सकता है, जिसे बैंक को दो महीने के भीतर सत्यापित करना होता है। updation में विलंबित खातों पर परिचालन संबंधी प्रतिबंध लगते हैं, परंतु केवल ग्राहक को पूर्व सूचना और स्मरण-पत्र भेजने के बाद।
इस चक्र को 10-8-2 के रूप में याद कर लें: low risk दस वर्ष, medium risk आठ वर्ष, high risk दो वर्ष। यदि कोई प्रश्न किसी भी श्रेणी के लिए पाँच वर्ष का विकल्प दे, तो वह distractor है — पाँच वर्ष PMLA के अंतर्गत record-retention की अवधि है, updation चक्र नहीं।
👤 Beneficial Owners, PEPs और Enhanced Due Diligence
जब ग्राहक कोई कंपनी, partnership firm, trust या unincorporated association हो, तो बैंक को विधिक आवरण के पार देखकर उस प्राकृतिक व्यक्ति की पहचान करनी होती है जो अंततः उसका स्वामी है या उस पर नियंत्रण रखता है। PML Rules प्रत्येक प्रकार की संस्था के लिए controlling-ownership की सीमाएँ निर्धारित करते हैं, और 2023 के संशोधन से वे सीमाएँ और कड़ी कर दी गईं — उत्तर पुरानी पाठ्यपुस्तक से नहीं, वर्तमान Rules से दें। जहाँ कोई भी प्राकृतिक व्यक्ति उस सीमा को पार न करे, वहाँ beneficial owner वह प्राकृतिक व्यक्ति होता है जो senior managing official के पद पर है।
Trust की स्थिति में बैंक को settlor, trustees, protector, निर्दिष्ट हित रखने वाले beneficiaries, तथा अंतिम प्रभावी नियंत्रण रखने वाले किसी भी व्यक्ति के नाम प्राप्त करने होते हैं। Unincorporated association के लिए प्रबंध निकाय का संकल्प और लेन-देन करने वाले व्यक्ति को दी गई power of attorney अनिवार्य अभिलेख हैं।
Enhanced due diligence politically exposed persons, correspondent banking संबंधों, Financial Action Task Force द्वारा चिह्नित क्षेत्राधिकारों के ग्राहकों, तथा ऐसे किसी भी संबंध पर लागू होता है जिसे बैंक high risk आँकता है। व्यवहार में इसका अर्थ है onboarding से पहले senior-management की मंज़ूरी, source of funds और source of wealth का सत्यापन, तथा लेन-देन की अधिक निकट निगरानी।
इसका दर्पण-प्रतिरूप है simplified due diligence, जो केवल प्रमाणित रूप से कम जोखिम वाले संबंधों जैसे small account के लिए अनुमत है। Small account में शेष राशि ₹50,000 से अधिक नहीं हो सकती, एक वित्तीय वर्ष में कुल जमा ₹1,00,000 से अधिक नहीं हो सकती, और एक माह में निकासी तथा अंतरण ₹10,000 से अधिक नहीं हो सकते। यह बारह महीनों के लिए वैध होता है, और यह प्रमाण देने पर कि ग्राहक ने OVD के लिए आवेदन कर दिया है, चौबीस महीनों तक बढ़ाया जा सकता है।
संस्थाओं के onboarding में संविधान संबंधी दस्तावेज़ भी माँगे जाते हैं, इसीलिए बैंकों के संगठन पर नियंत्रण अध्याय इस विषय के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ता है, और साथ ही Module A का बैंकिंग कंपनियों का लाइसेंसिंग भी।

🏛️ वैधानिक आधार, दंड और परीक्षा के जाल
Business-law के प्रश्न शायद ही कभी यह पूछते हैं कि KYC क्या है; वे पूछते हैं कि शक्ति कहाँ से आती है। RBI, KYC Master Direction को Banking Regulation Act, 1949 की Section 35A के अंतर्गत, PML Rules के Rule 9(14) के साथ पढ़ते हुए जारी करता है — यही इस अध्याय का सबसे अधिक परीक्षा-योग्य वाक्य है।
दायित्व PMLA की Section 12 में निहित हैं: निर्धारित लेन-देन के अभिलेख रखना, client identity का सत्यापन करना, beneficial owners की पहचान करना, और अभिलेखों को पाँच वर्ष तक सुरक्षित रखना — लेन-देन के अभिलेख लेन-देन की तारीख से, और पहचान के अभिलेख संबंध समाप्त होने की तारीख से। चूक पर Section 13 के अंतर्गत जुर्माना लगता है, जिसे Director, FIU-IND लगाते हैं, जबकि RBI के किसी निर्देश का पालन न करने पर अलग से Banking Regulation Act, 1949 की Section 47A के अंतर्गत जुर्माना लगता है।
बैंक KYC अभिलेखों को Central KYC Records Registry (CKYCR) पर भी अपलोड करते हैं, जिसे CERSAI चलाता है, ताकि एक बार सत्यापित ग्राहक कहीं और भी बिना कागज़ी कार्रवाई दोहराए onboard हो सके। तीनों को साफ़-साफ़ अलग रखें: RBI निर्देश देता है, FIU-IND रिपोर्ट प्राप्त करता है और दंड लगाता है, CERSAI रजिस्ट्री चलाता है।
नियामक जिन चूकों को बार-बार चिह्नित करता है वे जानी-पहचानी हैं: deemed-OVDs का कभी नियमित न किया जाना, ग्राहक से संपर्क करने के बजाय बल्क सिस्टम फ़्लैग से updation बंद कर देना, कॉर्पोरेट खातों में beneficial-owner के खाने खाली छोड़ देना। यह भी ध्यान रखें कि risk categorisation गोपनीय है, किसी मौजूदा ग्राहक द्वारा परिचय due diligence का विकल्प नहीं है, और जहाँ beneficial owner छिपाया जाए वहाँ खाता नहीं खोला जा सकता।
⚠️ सामान्य गलती: अभ्यर्थी मान लेते हैं कि अकेले PAN card से खाता खुल सकता है। PAN कोई Officially Valid Document नहीं है — वह एक कर संबंधी आवश्यकता है। पहचान और पते के लिए आपको फिर भी OVD चाहिए।
चूँकि प्रवर्तन की श्रृंखला अक्सर वसूली पर जाकर समाप्त होती है, इसलिए इसे SARFAESI के अंतर्गत asset reconstruction companies और Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 अध्याय के साथ दोहराएँ। Authorised dealer शाखाओं को इस Direction और बैंकरों के लिए FEMA प्रावधानों दोनों का पालन करना होता है, जबकि treasury के अभ्यर्थियों को यह देखना चाहिए कि सरकारी प्रतिभूतियों में primary dealers के लिए counterparty verification कैसे काम करता है। PMLA का मूल पाठ India Code पर उपलब्ध है; और नोट्स हमारे Banking Regulations and Business Laws tag hub में हैं।

🧠 अभ्यास MCQs: Customer Due Diligence मानदंड
Q1. RBI KYC Master Direction के अंतर्गत low-risk व्यक्तिगत ग्राहक के लिए periodic KYC updation कम से कम कितने समय में एक बार आवश्यक है — (a) 2 years (b) 5 years (c) 8 years (d) 10 years
उत्तर: (d) — Low risk के लिए 10 years, medium risk के लिए 8 years और high risk के लिए 2 years; पाँच वर्ष record-retention की अवधि है, updation चक्र नहीं।
Q2. PML Rules के अंतर्गत इनमें से कौन-सा Officially Valid Document नहीं है? (a) Passport (b) PAN card (c) Voter's Identity Card (d) Driving licence
उत्तर: (b) — PAN कर-प्रयोजनों के लिए अलग से आवश्यक है, परंतु वह कभी भी OVD सूची का हिस्सा नहीं रहा।
Q3. Simplified due diligence से खोले गए small account में एक वित्तीय वर्ष में सभी जमाओं का कुल योग कितने से अधिक नहीं होना चाहिए — (a) ₹50,000 (b) ₹10,000 (c) ₹1,00,000 (d) ₹2,00,000
उत्तर: (c) — जमा की सीमा वर्ष में ₹1,00,000, किसी भी समय शेष राशि ₹50,000, और निकासी तथा अंतरण एक माह में ₹10,000 है।
Q4. RBI, KYC Master Direction मुख्यतः Banking Regulation Act, 1949 के किस प्रावधान के अंतर्गत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए जारी करता है? (a) Section 35A (b) Section 22 (c) Section 21 (d) Section 49A
उत्तर: (a) — Section 35A, RBI को जनहित में निर्देश जारी करने का अधिकार देती है; Section 22 लाइसेंसिंग से और Section 21 अग्रिमों पर नियंत्रण से संबंधित है।
Q5. Central KYC Records Registry (CKYCR) का संचालन कौन करता है — (a) FIU-IND (b) CERSAI (c) NPCI (d) IBBI
उत्तर: (b) — CKYCR को CERSAI चलाता है; FIU-IND, PMLA के अंतर्गत रिपोर्ट प्राप्त करता है और IBBI insolvency professionals को विनियमित करता है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या periodic KYC updation और नए दस्तावेज़ों के साथ re-KYC एक ही बात है?
नहीं। जहाँ KYC सूचना में कोई परिवर्तन न हो, वहाँ पंजीकृत ईमेल, मोबाइल नंबर, ATM, डिजिटल चैनल या पत्र के माध्यम से दी गई self-declaration पर्याप्त है। नए दस्तावेज़ तभी चाहिए जब सूचना वास्तव में बदल गई हो या पहले किया गया सत्यापन संदिग्ध हो।
क्या बैंक केवल PAN card के आधार पर खाता खोल सकता है?
नहीं। PAN कोई Officially Valid Document नहीं है। ग्राहक को पहचान और पते के लिए OVD देना होगा, या Aadhaar e-KYC, offline Aadhaar verification, digital KYC अथवा V-CIP के माध्यम से सत्यापन पूरा करना होगा, और PAN अलग से लिया जाएगा।
जब कोई भी शेयरधारक निर्धारित सीमा पार न करे, तो beneficial owner कौन होता है?
ऐसी स्थिति में beneficial owner वह प्राकृतिक व्यक्ति होता है जो उस संस्था में senior managing official के पद पर है। बैंक को उस व्यक्ति का विवरण दर्ज करना होगा, न कि खाना खाली छोड़ना होगा।
KYC और लेन-देन के अभिलेख कितने समय तक सुरक्षित रखने होते हैं?
PMLA की Section 12 के अंतर्गत, लेन-देन के अभिलेख लेन-देन की तारीख से पाँच वर्ष तक, और पहचान के अभिलेख व्यावसायिक संबंध समाप्त होने या खाता बंद होने की तारीख से पाँच वर्ष तक रखे जाते हैं।
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